बुधवार, 17 सितंबर 2014

मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा !

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जींस -टॉप... कार्गो टी-शर्ट ... फंकी -शंकी  लुक वाले नौजवान छोकरों और बोल्ड ब्यूटीफुल और बिंदास लड़कियों से घिरा था मैं.भाई कुछ भी बोलो मुझे तो आज की नयी जनरेशन बेहद पसंद है... बिलकुल मीठे-नमकीन बिस्कुट फिफ्टी-फिफ्टी या फिर खट्टी -मीठी इमली की तरह.आज के ज़माने में जब हाफ  सेंचुरी के करीब या उसके पार लोग नायर रंग में रंगने लगे हैं तब जवानी को दिशाहीन ,उच्श्रृंखल या दीवानी कहने की फितरत एकदम बकवास है.यकीनी तौर पर समाज के आज या आज के समाज को महसूस करने के बाद बूढों का यह फिकरा ," हमने धूप में बाल सफ़ेद नहीं किये हैं " उन युवाओं की कड़ी चुनौती से जूझता हुआ लथपथ सा लगता है जो " होश भरे जोश "के साथ जिंदगी जीता है .इसमें गंभीरता के साथ पूरी मस्ती-शस्ती  भी होती है .... दिल से!
                                 यूं ही सीरियस मुद्दों  पर लिखते रहोगे या कभी हमारे साथ मस्ती भी!अपने डोले दिखाते एक " माचो मैन"और एक जोड़ी शैतान, शरीर कनखियों की शरारत ने मुझे यह एहसास दिला दिया कि मुहब्बत और करियर के साझा जज्बे को पुचकारती पीढ़ी का मीठा रिश्ता इस पल मुझसे क्या मांग रहा है.
                                     सच कहूं  !दद्दू और प्रोफ़ेसर  प्यारेलाल जब साथ हो जाते हैं तब किसी भी महफ़िल की रौनक क्या खूब जमती है .हुआ भी यूं... एहसासों का आकाश था ... चर्चा  के बहाने ही सही अल्फाजों के परिंदे मुहब्बत की रेशमी डोर लेकर उड़ने लगे ... ऊंचे... और ऊंचे....
                              कि कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है 
                              मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है 
यहाँ प्यासी धरती की बेचैनी और बरसने को आतुर बादल की बेकरारी किसकी है यह हर कोई समझ  सकता है .लेकिन दद्दू के मन में एक और बात आती है ," मनोविज्ञान में मैंने पढ़ा है की दूरियां प्यार को और बढा देती हैं " लेकिन इसकी मियाद भी तो तय होनी चाहिए न " मैंने टोका.उदास खोई सी आँखों वाला युवक गुनगुनाने लगा ... शायद उसके दिल की आवाज थी -
                            मैं तुझसे दूर कैसा हूँ,तू मुझसे दूर कैसी है 
                            ये तेरा दिल  समझता है या मेरा दिल समझता है  
दो जोड़ी आँखें जब एक-दूसरे से बिना कुछ  कहे सब कुछ कह रही थीं तभी प्रोफेसर प्यारेलाल ने कहा,"प्यार में दिल और दिमाग का सही संतुलन जरूरी है . मुहब्बत में FALL IN LOVE  के बजाये   RISE IN LOVE   होना चाहिए.खास तौर पर नयी पीढ़ी अगर इसे समझ गयी ( शायद अब समझ चुकी है )तब प्यारअँधा नहीं बल्कि तेज आँखों वाला और जिम्मेदार हो जायेगा."
                          कि मुहब्बत एक एहसासों  की पावन कहानी है
                          कभी कबीर दीवाना था कभी मीरा दीवानी है 
कबीर और मीरा से कम हीर-राँझा ... शीरीं -फरहाद...रोमियो- जूलियट से अधिक वाकिफ न्यू जेन .. शोख हॉट एंड स्वीट कहने लगी ," सर जी!उनके प्यार को समाज नहीं पाया .मेरी आँखों के आंसुओं को कौन समझेगा कि ये मोती हैं या पानी!
                          यहाँ सब लोग कहते है कि मेरी आँखों में आंसूं हैं
                          जो तू समझे तो मोती है  जो न समझ्र तो पानी है 
दद्दू अपनी जवानी का किस्सा बताते हैं ," हुआ यूं कि मुहब्बत की राह पर निकल पड़ी थी दो जोड़ी आँखें तकदीर का फ़साना कहिये कि साथ छूटा और लड़की  की शादी हो गई कहीं और.दो बरस बाद अपने बच्चे का परिचय उस युवती ने मुझसे "

                             
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