शुक्रवार, 31 अगस्त 2018

भूखे अफ़्रीकी बच्चे

Posted by with No comments
.   
भूखे अफ़्रीकी बच्चे
===============
Africa"s Hungry Children
By -Alf Hutchinson
अपने कैमरे के लेंस को जिस रोज़
ज़ूम किया था केविन कार्टर ने
सन्19894 का वह दर्दीला दिन
भूख से मरता सूडान का बच्चा
मौत के द्वार पर देता दस्तक
वहां पर मौजूद थे सिर्फ दो लोग
भूख से मरते बच्चे को देखने
लेकिन बीच था कुछ फ़ासला

*****
एक गिद्ध और एक छायानवीस
दोनों की नीयत थी अलहदा
पर लक्ष्य एक ही था दोनों का
भूख से मरता वह बच्चा!
*****
टाइम्स में छपा था वह चित्र
दुनिया थी स्तब्ध,निःशब्द
भुखमरी की दर्दनाक घड़ी ने
उतार फेंका था अपना लबादा
टिक ...टिक... टिक...टिक शुरू
और बजने लगी मौत की घंटियां
*****
मगर नंगा सच था मुंहफ़ाड़े
क्योंकि गिद्ध और छायानवीस
दोनों ही काटने को थे आतुर
उस बेबस की भूख से मौत से
उन्हें हासिल होने वाली फसल
लाभ जुटाने को थे उतावले
रसद-पहली जरूरत सूडान की
कार्टर को पुलित्ज़र की उम्मीद!
****
यक़ीनन फ़ैसलाकून नहीं हैं हम
नहीं कर सकते हम दुस्साहस भी
कोई हुक्मनामा जारी करने का
हम कभी वहां पर थे ही नहीं
गुस्से से  बौखलाता मुल्क है
अफ्रीका-----उड़ती है जहाँ पर सदा
बेतहाशा ग़रीबी, हताशा की ख़ाक
भूख की मौत की दहशत से गर्म!
****
दूर रहो! मत छुओ , तिल-तिल मरते
बीमार भूखे बच्चे को,दूर हटो...
केविन कार्टर के कानों में गूंजी थी
बौखलाहट भरी गुस्सैल आवाज़ें
और दम तोड़ते उस बच्चे से दूर
पर हट गया था केविन उसी पल
जैसे ही उसके सामने गुजरने लगे
भूख से जुड़े अनगिनत दिगर सच
रहस्य, त्रासद के लिहाफ में लिपटे
करने लगे अंतरात्मा को लहूलुहान
*******
फिर भी, भूखजनित महाभयावह
अफ़्रीकी सत्य की उन यादों ने
जिसमें शामिल थे दम तोड़ते बच्चे
उनकी जिंदा लाशें,उदास आँखें
सूखी चमड़ी से ढके कंकाल
सचमुच, भूख से मौत का नर्तन
रोंगटे तक झुलस गए केविन के!
*****
दैत्यों की तरह पीछा कर रही थीं
भूख से मौतों की यादें भयावह
दर्द से निढाल अफ्रीका की
तब्दील हो रहे थे जहाँ लोग
लाशों में,और लाशों के बीच ही
सचमुच पागल कर दिया केविन को
*****
महसूस किया था केविन ने
भूख से दम तोड़ता अफ्रीका
हम कभी समझ ही नहीं पाये
उसके दिल को निरंतर बींधते
मौत के कितने अनवरत आघात
बर्दाश्त करता रहा था केविन!
******
सिर्फ तीन महीने का वक्त ही 
गुजरता रहा पल-पल कर 
और भूख से जुडी त्रासद यादों ने 
रीता कर दिया उसका जीवन पात्र 
*****
प्रभु! अफ्रीका में जारी निरंतर 
भूख का यह नग्न नर्तन 
कब थमेगा यह अभिशाप?
क्या कभी अफ्रीका बन सकेगा 
भूख , फसाद और अपराध मुक्त 
खुशहाल। .. एक मुस्कुराता देश!
******
क्या केविन के छायाचित्र से 
खुलेँगी हमारी मुंदी  हुई आँखें 
और बहरे हुए कान भी ?
जहाँ अब भी निरंतर गूंजता है 
भूखे ,बदहाल ,मौत से जूझते 
मासूमों का करूण  विलाप? 

गुरुवार, 30 अगस्त 2018

अरे ओ! इंसान की औलाद!

Posted by with No comments

अरे ओ! इंसान की औलाद!

Inbox
x

kishorediwase0 kishorediwase0@gmail.com

Fri, Jul 13, 10:13 AM
to me
अरे ओ सूअर की औलाद
अबे ....गधे के बच्चे
गिरगिट की तरह तू रंग
बदलता है बदतमीज़!
सांप और नेवले भी भला
कभी हो सकते हैं दोस्त?
पानी में रहकर मगरमच्छ
से मत करो तुम बैर
घोड़े और घांस की दोस्ती
भला देखी है तुमने कभी?
एक ही मछली सारे तालाब को
कर देती है कितना गंदा
दीमक की तरह देश को
खोखला कर रहे हैं कुछ लोग
शतुरमुर्ग की मानिंद आंधियों में
रेत में कब तक ध॔साओगे सर?
कछुआ चाल चलोगे ज़िंदगी भर?
बिल्ली की तरह आंखें मूंदकर
कब तक पियोगे दूध?
अपशगुन! बिल्ली काट गई रास्ता
अरे ओ बेहया इंसान
सभ्य जानवर समाज ने भी
नहीं बनाईं अब तक कभी
अपमानित करने इंसानों को
कहावतें या विधान जैसा कुछ
और इंसानों! तुम सब के सब
और सड़ियल तुम्हारी सोच भी
काॅल आॅफ द वाइल्ड- में
जैक लंडन के अक्षर दावानल ने
कर दी है पूरी तरह निपट नंगी
अरे !हम तो सदा ही रहे हैं दोस्त
दुनियावी मानव समाज के
बदनीयत इंसान क्यूं बन गया
आखिर दुश्मन इंसान का?
प्राणिजगत ने तो सीख ली सभ्यता
पर तुम इंसानों की देखकर बेशर्मी
शरमा गई है अब शर्म भी
करते हैं वादा,कर लो अपमानित
जब तक जिसे जितना भी चाहो
नहीं कहेगा एनीमल किंगडम का
एक भी सदस्य कभी आदमज़ात को
अरे ओ!.... इंसान की औलाद !