गुरुवार, 18 सितंबर 2014

इश्क कीजै फिर समझिए जिंदगी क्या चीज है ..

Posted by with No comments


इश्क कीजै फिर समझिए जिंदगी क्या चीज है ...


न जाने क्यों अपने देश में सहज प्यार पर सेक्स की दहशत सवार होती है!सौन्दर्य की उपासना या आसान से दोस्ताना रिश्ते या तो सहमे हुए होते हैं या फिर उस प्रेम के भीतर "आदिम भूख "चोरी छिपे सेंध लगाने लगती है.दरअसल शुरुआत ही गलत होती है.प्यार और सेक्स को अलग रखकर सोचा  ही नहीं जा रहा है.इसलिए घरेलू रिश्ते तो घबराहट की सीमा में नहीं आ पाते लेकिन बतौर प्रशंसा दर्शाया गया प्यार भी रिश्ते की तलाश करने की हड़बड़ी पैदा कर देता है.आसान  सा जुमला है इन दिनों कहने के लिए ,"बड़ा ख़राब समय है "लेकिन कुछ हद तक भरोसे के संकट के इस दौर में स्त्री-पुरुष का हर आयु वर्ग असुरक्षितता की भावना के जबरदस्त चक्रवात में उलझा हुआ है.
            चलते-चलते यूँ ही किसी कार्ड -गैलरी में रखे वेलेंटाइन डे के रंगीन कासिदों पर  अपने दद्दू की नजर पड़ते ही उनका दिमाग हरकत में आने लगता है,"यार अखबारनवीस !क्यूँ इतना हौवा बनाकर रखा है ...इतना असह्जपन क्यूँ है?"
                          हम लबों से कह न पाए हाल-ऍ-दिल कभी 
                           और वो समझे नहीं ख़ामोशी क्या चीज है 
जगजीत सिंह के बोल का सम्मोहन तोड़कर मैं बाहर आता हूँ,"दरअसल प्यार के प्रदर्शन को समझने की शुरुआत ही गलत तरीके से करते हैं..... सो स्वीट आफ यू ... आई लव यू ..या आई लव यू आल ... चुम्बन या फ़्लाइंग किस भी अपनापन दर्शाने का नव-आधुनिक अंदाज है.यह मात्र किसी की अच्छाई,खासियत के प्रति सराहना का रिश्ते की गहराई के आधार पर व्यक्त किया जाने वाला छुआ या अनछुआ प्रदर्शन है.किसी भी लिहाज से इसे शारीरिक अंतरंगता की हद तक जाकर सोचना मूर्खता होगी."
                           प्यार एक इबादत है..पूजा... एहसास...समर्पण...जूनून... सेन्स आफ अप्रीसिएशन तथा तहे दिल प्रशंसा की अभिव्यक्ति है.यह नामदार रिश्तों से शुरू होकर अनाम रिश्तों को छूती है....ईश्वर की आराधना  कर प्रकृति के अंग -प्रत्यंग को सहलाकर सूफी समर्पण के साथ -साथ समूची मानवता को बाहुपाश में लेता है यही प्यार.तब प्यार का चरम ,सेक्स की दिशा में जाने की बात समझना या ले जाना दिमागी दिवालियापन है.प्यार का सेक्स संबंधों में रूपांतरण विवाह के जायज रिश्ते की जरूरत बन सकता है लेकिन बुनियाद कभी नहीं.
                          बे इश्क जरा आदमी की शान ही नहीं 
                          जिसको न होवे इश्क वो इंसान ही नहीं
यक़ीनन वो इन्सान ही नहीं जिसने इश्क के रंगों को ... उसके अलहदा चेहरों को पहचाना ही नहीं  और न ही एहसास किया."हे री मैं तो प्रेम दीवानी" कहने वाली मीरा का कृष्ण के प्रति समर्पण इश्क का सूफियाना अंदाज है.बुल्लेशाह,ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ,बाबा फरीद,निजामुद्दीन औलिया और कई सूफी संत हैं जिन्होंने कहा,"ईश्वर के प्रति इश्क समर्पण की पराकाष्ठा  है और कुछ भी नहीं पीड़ित मानवता के दुःख-दर्द का निवारक है यह इश्क.!"
                             इश्क ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया 
                               वर्ना हम भी आदमी थे काम के 
गलत है....प्रेम पहले अँधा होता था ,अब नहीं."डोंट फाल इन लव "  बात यूँ होनी चाहिए कि प्रेम की  भावना आपको बेहतर इंसान बनाए,"राइजिंग इन लव".हाँ,वेलेंटाइन डे को अपने दद्दू बिलकुल बुरा नहीं मानते.उनका सिर्फ इतना ही कहना है नौजवान दोस्तों से के "यारों!किसी का दिल मत दुखाना....प्यार का इजहार दिलों को जीतने के लिए होना चाहिए ,दिलों को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं.यह तो किसी के प्रति प्यार दिखाने का महज प्रतीक है इसे शालीनता और रज़ामंदी  चाहिए ... फूहड़ता या वाहियातपन  या जबरदस्ती नहीं.जरा सोचें कि मिठास भरी यादें मिली या कसैलेपन का अहसास!वेलेंटाइन डे को सिर्फ रूमानी इश्क समझने वालों को यह ख्याल रहे कि,"  It's beautiful necessity of our nature is to love something ".   सच्चा प्यार उन भूतों क़ी तरह होता है जिसके बारे में बातें तो ह़र कोई करता है पर बहुत कम लोग उसे देख ,महसूस और समझ पाते है.
                     मैं भी अपने मन में कभी-कभी यही सोचने लगता हूँ ,"नहीं है मुझे संपत्ति क़ी हवस ... न मैं भूखा हूँ सम्मान का....न खुशियों  में ही हमेशा डूबता रहूँ....मैं तो बस इतनी ही ख्वाहिश रखता हूँ... यही गुजारिश है कि मेरे दिल में इतना प्यार हो कि मैं लोगों को और लोग मुझे हमेशा प्यार करते रहें ... हमेशा... हमेशा...हमेशा...
                             शुभ रात्रि... शब्बा खैर... प्यार सहित...
                                                                                          किशोर दिवसे 
                                                                                         Mob;09827471743    
                                       
Reactions:

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें