शुक्रवार, 26 सितंबर 2014

सियासी हनीमून ख़त्म ,,तलाक

Posted by with No comments
 तेजी से बदल रहे हैं सियासी समीकरण। हर पल  नए दांव की तैयारी आशंका और अंदेशा  !महाराष्ट्र की राजनीति  एक ही दिन दो प्रमुख गठबंधनों के टूटने की गवाह बनी और इसके साथ ही विधानसभा चुनाव में मुकाबला बेहद रोचक हो गया क्योंकि अब चारों प्रमुख दल भाजपा, शिवसेना, कांग्रेस एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अलग अलग चुनाव लड़ने जा रहे हैं। भाजपा—शिवसेना और कांग्रेस—राकांपा के पुराने गठबंधनों...

छत्तीसगढ़ में कौन बनेगा करोड़पति की शूटिंग ...... रिश्ते में हम आपके फैन लगते हैं ssssssss हाँ ssss ई ! =

Posted by with No comments
छत्तीसगढ़ में कौन बनेगा करोड़पति  की शूटिंग ================================ रिश्ते में हम आपके फैन लगते हैं ssssssss हाँ ssss ई ! =======================================  अरसे  से चर्चित रहा है कौन  बनेगा करोड़पति यानी-केबीसी। अनेकों लोग समाज के अलहदा दर्जे से इस महोत्सव...

बुधवार, 24 सितंबर 2014

गर्व से कहो कि हम भारतीय हैं ! मंगल मिशन कामयाब

Posted by with No comments
 गर्व से कहो कि हम भारतीय हैं ! मंगल मिशन कामयाब सचमुच  यह एक खुश खबरी है। भारत ने आज अपना अंतरिक्ष यान मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर इतिहास रच दिया। सबसे पहले  टीम को बधाई। कामयाबी का श्रेय कौन लेगा यह दूसरी बात है। कार्यकाल मोदी सरकार होने की वजह से निश्चित तौर पर...

Kishore Diwase: तभी आकाशवाणी श्रोताओं के भी आएंगे-अच्छे दिन!

Posted by with No comments
Kishore Diwase: तभी आकाशवाणी श्रोताओं के भी आएंगे-अच्छे दिन!: आकाशवाणी  का जलवा अब भी कहीं कम नहीं हुआ है। अनेक पीढ़ियां रेडियो सुनकर जवान हुई कुछ बुढा  भी गयीं। संवाद में तेजी लाने के उद्देश्य से आका...

चिड़ियाघर का बाघ ,युवक की मौत ...... सवालों के पैने नाखून

Posted by with No comments
 चिड़ियाघर का  बाघ ,युवक की मौत ...... सवालों  के पैने  नाखून मुझे जैक लन्दन का उपन्यास याद  आ रहा है -CALL OF THE WILD. इंसान और जंगल  अंतर्संबंधों पर रोचक विचारोत्तेजक नावेल है। जो  होना था सो हो गया। सवाल ये है कि क्यों हुआ और क्या इसे रोका जा सकता था? दिल्ली...

मंगलवार, 23 सितंबर 2014

घर को लगी आग घर चिराग से

Posted by with No comments
 ये लो इसे  कहते हैं घर को लगी आग घर  चिराग से। पीएमओ और मीडिया के रिश्ते में खटास की खबर तो काफी पुरानी हो चुकी थी। मीडिया की बौखलाहट   इस मुद्दे पर भी थी कि  पीएम मीडिया को उतनी तवज्जो क्यों नहीं दे रहे है जितनी अमूमन प्रत्येक प्रधानमंत्री दिया करते थे .।  पीएम के विदेश दौरे पर मीडिया दिग्गजों और कुछ अखबार मालिक भी साथ हुआ करते थे। अब अचानक क्या हुआ कि ...

सोमवार, 22 सितंबर 2014

तभी आकाशवाणी श्रोताओं के भी आएंगे-अच्छे दिन!

Posted by with No comments
आकाशवाणी  का जलवा अब भी कहीं कम नहीं हुआ है। अनेक पीढ़ियां रेडियो सुनकर जवान हुई कुछ बुढा  भी गयीं। संवाद में तेजी लाने के उद्देश्य से आकाशवाणी ने शनिवार को अपने सभी केन्द्रों को मुख्यालय सेजोड़ने रेडियों कांफ्रेंसिंग शुरू की। कार्यक्षमता बढ़ने यह एक बेहतर पहल है। मार्केटिंग के इस चरम दौर...

रविवार, 21 सितंबर 2014

Student Zone

Posted by with No comments
Coming So...

Story

Posted by with No comments
Coming so...

शुक्रवार, 19 सितंबर 2014

Posted by with No comments
अनुकाव्य  पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार।&nbs...

अगर कभी हसबैंड स्टोर खुल गया तो???

Posted by with No comments
डोंट बी संतुष्ट... थोडा विश करो.. डिश करो...हालाकि यह पंच लाइन किसी ऐसे विज्ञापन की है जिसमें शाहरूख खान कुछ प्रमोट करना चाहते हैं लेकिन यूं लगता है कि इसकी थीम महिलाओं को मद्दे नजर रखकर सोची गई है". " बात कुछ हज़म नहीं हुई ... जरा और खुलासा करो" मेरी छोटी सी बुद्धि के खांचे में बात फिट न होने पर मैंने दद्दू से पूछा."यार अखबारनवीस !क्या इस दुनिया में महिला को कोई पूरी तरह संतुष्ट कर सकता है"...

कौन है व्यापारी और उसकी चार पत्नियाँ !

Posted by with No comments
कौन है व्यापारी और उसकी  चार पत्नियाँ ! सुनो विक्रमार्क! एक अमीर व्यापारी की चार पत्नियाँ थी.वह अपनी चौथी पत्नी को सबसे ज्यादा प्यार   करता था और दुनिया की सबसे बेहतरीन सुविधा मुहैया कराता.अपनी तीसरी पत्नी से वह अपेक्षाकृत कम प्यार करता था.अपने दोस्तों को भी दिखाया करता पर...

..ऍ मसक्कली मसक्कली ...उड़ मटक्कली ..मटक्कली....

Posted by with No comments
..ऍ मसक्कली मसक्कली ...उड़ मटक्कली ..मटक्कली.....  कुँए के मेंढक और समंदर की शार्क में फर्क होता है जमीन -आसमान का.बरास्ता जिद, जूनून और जिहाद कोई इंसान अपना किरदार ... तकदीर और तदबीर कुँए के मेंढक की बजाए समंदर की शार्क जैसा बना सकता है.उसे बस सही वक्त पर सही सोच के जरिए सही फैसले ...

जब चली सर्द हवा मैंने तुझे याद किया

Posted by with No comments
ये सर्द रात ,ये आवारगी,ये नींद का बोझ  हम अपने शहर में होते तो घर चले जाते बढ़ते शहर में मौसम को जीने का अंदाज भी चुगली कर जाता है.या फिर यूँ कहिये के बदलते वक्त में मौसम को जीने की स्टाइल भी "अपनी अपनी उम्र" की तर्ज पर करवटें बदलने लगती हैं.सर्दियों का मौसम अपना अहसास...

शहर काग़ज़ का है और शोलों की निगहबानी है

Posted by with 2 comments
शहर कागज का है और शोलों की निगहबानी है  अगर तासीर की बात करते हैं तो शहर और इंसान एक बराबर हैं.और, शहर ही क्यों गाँव,शहर और महानगर भी कई दफे इन्सान की जिन्दगी जीते हैं उनका भी दिल धडकता है. वे भी हँसते हैं... रोते है.. गाते हैं...खिलखिलाते हैं .जब मह्सूस  करते...

तुम शीशे का प्याला नहीं झील बन जाओ..

Posted by with No comments
तुम शीशे का प्याला नहीं झील बन जाओ.. अब तो दादा -दादी या नाना -नानी के मुंह  से कहानियां सुनने का फैशन ख़त्म ही हो गया है.आजकल के बच्चों  के पास इसके लिए वक्त ही नहीं होता. न वे इसमें रुचि ही लेते हैं.कम्प्यूटर तो बस बहाना है .इन्ही कहानी-किस्सों के जरिये बच्चों के मन...

फिर मत कहना माइकल दारु पी के दंगा करता है

Posted by with No comments
फिर मत कहना माइकल दारु पी के दंगा करता है  O सड़क  के किनारे चित्त बेसुध पड़ा इंसान ... नशे में बकबक जारी है.एकाएक एक कुत्ता आया मुंह चाट कर अपनी टांग उठाई और.... O चखना  -चेपटी लेकर दारू भट्टी  के पास पी और छोटी सी बात पर लड़ पड़े दो दोस्त.गुस्से ...