सोमवार, 13 जून 2011

मैं हूँ खुश रंग हिना.. प्यारी खुश रंग हिना!

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मैं  हूँ खुश रंग हिना.. प्यारी खुश रंग हिना!

मुहब्बत है उसे हर किसी से.उम्र ,जाती या मजहब की दीवारों से दूर वह सबको अपने प्यार में रंग देती है.हरी ओढनी में इतराकर ,इठलाकर  जुल्फें हों या हथेलियाँ अपने जिस्म के हरे लहू में तर-बतर करना ही उसकी फितरत ,आदत और अदा भी है.गजब का सुकून दिलाती है उसकी सोहबत.पिस कर खुद जर्रा-जर्रा  बन जाएगी .मगर क्या मजाल कि उसके चूमते ही हर एक की हथेली से यह ख्वाहिश  न निकले-
              मोहे रंग दे... मोहे रंग दे..मोहे रंग दे रंग दे रंग दे...
हिना हर किसी की अपनी है.उसके साथ स्कूल जाती हुई बच्ची , पत्नी,प्रेमिका,भाभी,बहू, ननंद,माँ ,सास और सहेली भी .औरत और मर्द से जुड़े हर रिश्ते में वाबस्ता है हिना.खास तौर पर उम्र के उस दौर में जब बालों में चाँदी की रंगत घुलने लग जाती है तब हिना की याद  आती है.पहले तो उम्र दराज  होने पर ही हिना का साथ नसीब होता था अब तो उम्र की मोह्ताज्गी कहाँ रही ?खैर सर  के बालों का मसला अलग है .यही हिना किसी की हथेलियों के आईने का हरा सिन्दूर बनकर दिल में छिपी मुहब्बत का रंग उभार देती है.शरमाकर गुलाबी से सुर्ख होती हिना से रंगी नाजुक हथेलियों को देखकर उनका महबूब दिल्लगी करते हुए कुछ इस अंदाज में छेड़ने लगता है-
                   जी  में आता  है की चूम लू मेहंदी से रचे हाथ
                    बहुत दिनों  में आज पकडे गए हो रंगे हाथ
उस रोज जब दद्दू  ने हिना के दो पैकेट एक साथ लिए तब मैंने पुछा था ," यार ! एक साथ दो पैकेट!" दद्दू ने सफाई दी थी,"एक तुम्हारी भाभी के लिए और दूसरा अपने आधे खल्वाट के बचे-खुचे बालों के लिए." मैंने पूछा, "बाजार में  इतने हेयर कलर आते हैं फिर  हिना ही क्यों ? दद्दू ने अध् गंजी  चाँद खुजाते हुए कहा ,"बाकी रंगों में केमिकल होता है .हिना या मेहंदी में प्राकृतिक रंग है.बालों को नुकसान नहीं करती और सर की गर्मी शांत करती है सो अलग.वैसे अब स्टाइल का जमाना है सिंथेटिक कलर्स भी आम तौर पर ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं.इतने में जींस -टाप पहनी एक युवती उसी पार्लर में आई.वह गुनगुना रही थी-
                   मैं हूँ खुश रंग हिना... प्यारी खुश रंग हिना...
अपनी  जवानी के दिन याद आते ही दद्दू को एक वाक्य याद आया.उनकी शादी तय हो चुकी थी.दद्दू ने अपनी प्रेमिका( वर्तमान भाभीजी)से वायदा  किया था घर आऊँगा... फिर कहीं चलेंगे.लेट लतीफ दद्दू जब  घर पहुंचे भाभीजी पावों में मेहंदी लगा चुकी थी .दद्दू को गुस्सा आ गया.... यार तुम्हे मालूम था बाहर जाना है फिर भी!!!मान-मनुहार  करने के बाद भाभीजी  ने एक शेर सुनायाजिसे  सुनकर दद्दू भी मुस्कुराये बगैर न रह सके-
                    याद आया यार के आने का वायदा उन्हें तो कब
                   जब रात को पाँव में मेहंदी लगा चुके
हिना अब महज शगुन या संस्कार नहीं आर्ट से भी बढ़कर आय का जरिया बन चुकी है.लड़कियां बड़े शौक से मेहंदी लगाना सीखती हैं.प्रशिक्षित होकर तीज-त्यौहारों के वक्त अपने या दूसरों के हाथों पर मेहंदी लगाने की कला को पार्ट टाइम व्यवसाय भी बनाया जा सकता है.दुल्हन की हथेलियों पर मेहंदी लगाने की रस्म अब फैशन में शुमार हो चुकी है.लड़कियां तो क्या लड़के भी अब मेहंदी की डिजाइनें बनवा रहे हैं.
  दुकान से हम लोग लौटकर घर पहुँच चुके थे.काफी की चुस्कियों का दौर चल ही रहा था कि पप्पू  नमस्ते अंकल  कहकर कहीं जाने को निकला.अपनी शाहरूख स्टाइल के बालों को खास अंदाज में झटककर बाहर निकलने से पहले वह गुनगुना रहा था -
                      मेहंदी लगा के रखना ,डोली  सजा के रखना...
एक बार जब हम फिर मेहंदी पर बात कर रहे थे ,मुझे अपने कालेज के दिनों की  याद ताजा हो आई. मैं "उससे" अक्सर मिला करता था.मैंने दद्दू को बताया ," हम लोग यूं ही घूमने निकल गए थे.उसने जिस अंदाज से दोनों हथेलियाँ मेरे सामने खुली रखीं मुझे लगा " मेहंदी का बोझ नहीं उठा सकती ये नाजुक कलाइयाँ". मैंने मेहंदी रची उन कलाइयों को चूमकर कहा-


                        वल्लाह ये नाजुकी तेरी सलामे बयाँ में 
                        आधा ही हाथ उठ सका मेहंदी के बोझ से
सभी ने खूब सुनी है फिल्मों में हिना की खिल खिलाहट -पुराने गीतों में जो खुशबू है आज की नौजवान पीढ़ी शायद वाकिफ न हो.मेहंदी लगी मेरे हाथ रे...मेहंदी लगे थे मेरे हाथ,जो तुम आये थे...मेहंदी रंग तो लाई है लेकिन किस्मत ये खेल खेली....हमारी साँसों में आज तक वो हिना की खुशबू.. आदि आदि.
                       दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका में मेहंदी अत्यधिक लोकप्रिय है . मनोचिकित्सक डा. श्रीवास्तव ने कहा,"हाथ-पाँव में मेहंदी लगाने का वैज्ञानिक कारण है .यहाँ पर किरेटिन का स्तर सर्वाधिक होता है .राजस्थान में मेहंदी प्राचीन लोककला है.केरल में इसे मिलांची कहते हैं.अरब और पर्शिया में मेहंदी गर्भावस्था के सातवें महीने ,प्रसूति,शादी,सगाई व् पारिवारिक समारोहों में लगाईं जाती है.
                            " अंकल! जिसकी स्किन जितनी गर्म होती है हिना उतने दिन टिकती है जितना धुलती है उतनी रचती है" बबली की सहेली  कमसिन ने मेहंदी पर अपनी भागीदारी निभाने का मौका नहीं छोड़ा.दादी भी बोलीं,"दद्दू बेटा!मेहंदी लगाने से पति की आयु बढ़ती है." इसी बीच रंगीली भी मेहंदी की ट्रेनिंग क्लास से लौट चुकी थी.चहक चहककर  कहने लगी ," देखो न ... मेरे हाथों  पर अरेबियन स्टाइल की मेहंदी लगी है .मेरी बाकी सहेलियों ने भी स्पार्कल जर्दोरी ,जिग-जैग,बूटी और ब्लैक एंड रेड स्टाइल से मेहंदी  लगाईं है!!!
                                                                                   रंग -बिरंगी भावनाओं के साथ 
                                                                                           किशोर दिवसे 
                      


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5 टिप्‍पणियां:

  1. हिना पर इतना सुन्दर और शोधात्मक आलेख पढ़कर अच्छा लगा। बहुत कुछ नया भी जाना ।
    बधाई एवं शुभकामनाएं।

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  2. Thanx Dr. Divya . Your words are fragrant rose petals for me. Plz. keep it up

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  3. sir hinaa ti fir hinaa hai apni rangat dusaro ko khus rakhne ke liye khud ko lutaati hai.......... jindagi ka rang.....kuchh anmol yaade..... sir aajkal professor saahab kahaa gaye hai.... ?

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  4. क्या खुब लिखा है
    किसी ने
    मोहब्बत उस चिडिया का
    नाम है
    जो 1 बार बैठ गयी
    तो फिर
    उड़ने का नाम ही
    नही लेती
    @मैने ही लिखा-mantoshblog.wordpress.com

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