गुरुवार, 30 जून 2011

डाक्टर्स डे पर सभी डाक्टरों को बधाई

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डाक्टर्स डे आज जुलाई की पहली तारीख को है. सभी डाक्टरों को बधाई .साथ ही यह आव्हान भी की वे यह सोचें की मरीजों के साथ उनके भावनात्मक  सम्बन्ध कितने रह गए है. मेडीकल ज्यूरिसप्रूडेंस  में Doctor -Patient bonding  का विस्तृत उल्लेख किया गया है. फिल्म मुन्ना भाई एमबीबी एस  में डीन...

बुधवार, 29 जून 2011

अपनी ही साँसों का कैदी, रेशम का यह शायर

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शहतूत की शाख पे बैठा कोई                                                              बुनता है रेशम के तागे लम्हा-लम्हा खोल रहा है, पत्ता-पत्ता...

मंगलवार, 28 जून 2011

ख़ुशी का पैगाम कहीं . कहीं दर्दे जाम लाया .

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शायद इस बूढ़े बाप को मनी आर्डर भेजा हो बेटे ने..मेरा इंटरव्यू काल लेटर होना चाहिए...पप्पू  ने सोचा ... बलम परदेसिया को दुखियारी बिरहन की याद आई हो... उस भाभी का मन कह रहा था जिसके साजन नौकरी -धंधे की जुगत में दूर शहर में रहते हैं... और नजरें चुराकर चांदनी भी देखती है कहीं उसके चकोर ने गुलाबी...

सोमवार, 27 जून 2011

तुम शीशे का प्याला नहीं झील बन जाओ...

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अब तो दादा -दादी या नाना -नानी के मुह से कहानियां सुनने का फैशन ख़त्म ही हो गया है.आज कल के बच्चों  के पास इसके लिए वक्त ही नहीं होता. न वे इसमें रुचि ही लेते हैं.कम्प्यूटर तो बस बहाना है .इन्ही कहानी-किस्सों के जरिये बच्चों के मन में संस्कार डाले जाते थे. फिर भी पढने वाले लोग या तो किताबें...

हम सब इस रंगमंच की कठपुतलियां हैं...

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धू-धू कर जलती चिता... शोक संतप्त  जनों को ढाढस बंधाते शब्द और मृत्यु को प्राप्त इंसान के जीवन की यादों से जुड़े पहलुओं के बीच ही कहीं से जन्म लेता है शमशान वैराग्य.सच कहें तो मौत के एहसास से चोली-दामन का साथ है जिंदगी का.शायद जीवन के होने का अभिप्राय बोध भी करा जाता है -"मौत " इन  दो...

शनिवार, 25 जून 2011

बरगद की बातें करते है गमलों में उगे हुए लोग!!!!

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सारी जिंदगी एक ऐसी  में तब्दील हो चुकी है जिसमें कई लोग अपनी बोली लगाने हद दर्जे तक समझौते कर रहे है in!क्रिकेटरों  की मंडी में सबसे बड़ी बोली लगी थी  और बिक गए सितारा क्रिकेटर.जिसको देखो वही बिकने पर उतारू है.फ़िल्मी सितारे., अफसर, नेता, मीडिया,कर्मचारी ... अमूमन जिंदगी के सभी क्षेत्रों ...

शुक्रवार, 24 जून 2011

गुरुदेव ने बनाया "उन तीनों को" अपना गुरु

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एक बार किसी गुरु की मृत्यु हो रही थी .उनके शिष्य ने पूछा,"गुरुजी, यह तो बताइये आपके गुरु कौन थे?"उन्होंने कहा,"बेटा! मेरे एक हजार गुरु थे.अगर मैं नाम गिनाना चाहूं तब कई महीने लग जायेंगेऔर काफी देर हो जाएगी."शिष्य के चेहरे पर सवालिया निशान देखकर गुरु समझ गए.उन्होंने स्वत  ही जिज्ञासा शांत करते हुए...

गुरुवार, 23 जून 2011

वो कागज की कश्ती ...वो बारिश का पानी!

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लहरों में बहती गई वह कागज की छोटी सी नाव . मेरी नन्ही अँगुलियों ने ढेर सारी लहरें बनाकर उन्हें बहने दिया आगे और आगे....टप टप बारिश की बूँदें उस नाव को हिचकोले देती पर अलमस्त लहरों ने उसे मेरी आँखों से ओझल कर दिया.कागज़ की उस कश्ती से जुडी बचपन की यादे.मुझे ताजा हो आईं.ऐसा  क्यूं होता है की  जब-जब...

शुक्रवार, 17 जून 2011

देखा तुझे तो तेरे तलबगार हो गए!!!!

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हसरत.. आरजू...तमन्ना...और ख्वाहिश .कहें तो चार अलहदा शब्द लेकिन अर्थ अमूमन एक ही निकलता है.हरेक इंसान के लिए सन्दर्भ भले ही अलग-अलग हों लेकिन मायने कहीं न कहीं पर लक्ष्य से सीधा रिश्ता बना ही लेते हैं.कोई शब्द रेशमी अहसास लिए होता है तो कोई जिन्दगी की तल्ख सच्चाई.रूहानी मतलब भी कोई शब्द अपने भीतर समेट...

गुरुवार, 16 जून 2011

किस्सों में छिपे हैं जिंदगी के कहे-अनकहे सच!

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किस्सों में छिपे हैं जिंदगी के कहे-अनकहे सच! मैनेजमेंट के किस्से और उनकी फेहरिस्त बड़ी लम्बी है.उसे हर कर्मचारी  या बॉस अपने-अपने अजेंडा  के मुताबिक समय-समय पर फिट क़र देता है.बड़ा ही रोचक है यह मायाजाल.अब ये तमाम फंडे ऐसे अनारदाने हैं जिनसे छूटी आतिशबाजियां किस्सों की शक्ल में सारे संस्थानों...

हम क्यों बने रहते हैं कछुए!!!!

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हम क्यों बने रहते  हैं कछुए!!!! एक बार एक कछुआ परिवार पिकनिक मनाने गया.अब कछुओं के बारे में नौ दिन चले अढाई कोस वाली कहावत तो आपने  सुनी होगी.तैयारी  करने में ही उन्हें सात बरस का समय लग गया.आखिरकार वह कछुआ परिवार कोई अच्छी जगह तलाशने घर से निकल पड़ा.अपने सफ़र के दूसरे साल उन्हें एक...

मंगलवार, 14 जून 2011

फर्न की हरी चटाई और आसमान छूते बांस

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फर्न की हरी  चटाई और  आसमान छूते बांस  दारू-शारू.... मुर्गा-शुर्गा...हा ..हा.. ही.. ही.. और ढेर सारी मस्ती.अमूमन जंगल जाने का मकसद भी यही हुआ करता है.और कुछ नहीं तो बकर ... का अनवरत दौर जो जहाँ चार यार मिल जाएँ  वहां ... हुआ तो अल्सुब्बह तक चलता रहता है.लेकिन मुझे याद है एक बार...