सोमवार, 26 सितंबर 2011

एक हंसी हर वक्त हो उनको मनाने के लिए

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पिताजी.. मैं नहीं चाहता गुस्सा करना पर क्या करूं अपने आप पर काबू नहीं रख सकता."- एक बेटा कह रहा था." बेटा तुम एक काम करना,जब भी तुम्हे गुस्सा आये दरवाजे  पर एक कील ठोंक देना." पिता ने उसे सलाह दी.कुछ ही दिनों में पूरा दरवाजा कीलों से भर गया.बदशक्ल दरवाजा दखकर बेटे को बड़ी  कोफ़्त हुई.वह...

शुक्रवार, 23 सितंबर 2011

" जाति -बंधन से लहू लुहान होते दिलों के रिश्ते.

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" जाति -बंधन से लहू लुहान होते दिलों के रिश्ते... आंसुओं  के मोती झर-झर  के वहीँ पर गिरे जहाँ पर अखबार के कालम में ढेर सारे क्लासिफाइड छपे थे.- बंगाली वर चाहिए,सजातीय श्रीवास्तव.. जैन.. ब्रह्मण... पंजाबी ...मराठी.. आदि-आदि... वर चाहिए... जातिबंधन के नासूर ने रूही का दिल छलनी कर दिया था.वह  सोचने लगी,"," शादी तो दो दिलों का चिरंजीवी रिश्ता है .जाती की दीवारों से क्यों लोग इसे तंग कोठी ...

शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

पचपन बरस का होने पर......

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   करिश्माई होती हैं दुआएं .उम्र पचपन की होने पर उम्रदराज होते जाने का मतलब बेहतर समझ में आने लगता है.अधिक जिम्मेदार होने की खुशियाँ और अदृश्य  दराज में रखी उम्र कितनी बची इसकी धुकधुकी भी...यानि कुछ खट्टा, कुछ मीठा.फिर भी फेस्बुकिया रिश्ते का एहसास अब मेरे मन को सम्मोहित कर चुका है.मेरे...

मंगलवार, 2 अगस्त 2011

छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर में 4000 समलैंगिक

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छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर में 4000  समलैंगिक ... आज नवभारत बिलासपुर  और रायपुर संस्करण का बैनर है. यकीनन यह खबर  स्वास्थ्य अमले के लिए सबसे बड़ी चुनौती है.  वैसे इसके लिए एन जी ओ कुनबे  तथा समाज को जनजागृति का कार्य जमीनी  स्तर पर करना चाहिए. एच  आई वी टेस्ट में हजारो का पाजिटिव आना छत्तीसगढ़ के लिए एक बेहद खतरनाक संकेत है.एड्स जाग्रति से जुड़े सरकारी / गैर...

रमजान का चाँद और खूबसूरत हरियाली....

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आसमान  की चादर से नीचे झुककर रमजान के चाँद ने खूबसूरत हरियाली को देखा.रोजेदारों के घर इबादत की पाकीजगी से सराबोर थे.हरियाली को देखकर चाँद मुस्कुराया और दोनों गुफ्तगू करने लगे.वक्त-वक्त की नमाज के लिए रोजेदारों की मसरूफियत के साथ ही सहरी -अफ्तार की आपधापी भी चाँद के लम्हों का एक हिस्सा थी....

रविवार, 17 जुलाई 2011

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5. उलूक -        THE OWL -- by- EDWARD THOMAS  पहाड़ियों की ऊंचाइयों से होकर                   तलहटी तक नीचे उतरा मैंभूखा ,पर नहीं था क्षुधार्त शांत पर ज्वालामुखी बसा था मुझमें उस उत्तरी चक्रवात से जूझने तब...

शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

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कृष्ण करे  तो रास लीला, हम करें तो... राष्ट्रपति की गोवा यात्रा निजी थी या सरकारी -शीर्षक से आशीष कुमार ने कई अत्यधिक प्रज्ज्व्लन्शील   मुद्दे उठाये हैं.अगर समुद्र तट कानून के नजरिये में सार्वजनिक स्थान है तब छायाचित्र लेना क्यों गलत है?यह भी सच है कि २०० मीटर का घेरा भारतियों के लिए प्रतिबन्ध , विदेशियों के लिए नहीं? रहा सवाल  भ्रष्टाचार का- मै  तो दो टूक इस राय...

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,उन्हें मगर शर्म क्यों नहीं आती? नवभारत के बिलासपुर ,छत्तीसगढ़ संस्करण में एक खबर छपी है." सरकारी  परमिशन सड़क पर बाँट रही मौत".पंद्रह बरस  क़ी बच्ची झलक  मेघानी  की मौत कई सवाल खड़े करती है. नो एंट्री में प्रवेश करने के लिए सरकारी  ट्रक अन्नदूत को भीड़ भरे इलाके से जाने क्यों दिया गया?यातायात विभाग की चौकसी क्यों नहीं?  ट्रकों को भीड़ भरे यातायात के समय जाने...

आखिर धर्म या मजहब है किसलिए?

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नेपाल की इक्कीस वर्षीय नन सामूहिक बलात्कार का शिकार हो गई.जिस ननरी में उसने दस बरस तक अपनी सेवाएँ दी वहा से उसे निकाल दिया गया.विगत माह एक पब्लिक बस में उसे पांच लोगो ने बलात्कार का शिकार बनाया था.ननरी  का दो टूक हुक्मनामा है कि वह युवती अब नन या भिक्षुणी नहीं रह सकती .नेपाल बुद्धिस्ट फेडरेशन  का मंतव्य है कि बलात्कार की शिकार नन अब धर्मविहीन हो गई. क्या धर्म दो कौड़ी का बना दिया गया...

मंगलवार, 5 जुलाई 2011

दुखवा मैं कासे कहूं मोरी सखी!!!

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प्रिय सखी सच कहती हूँ... मेरी तकदीर में सुख कम दुःख ज्यादा लिखे हैं.अक्सर सफ़र पर ही रहती हूँ.कभी शहर के भीतर तो कभी लम्बे सफ़र पर....छोटे शहर से बड़े शहर तक.कई बार मेरी यात्रा एकदम तन्हाइयों में होती है . हाँ शहर के भीतर जरूर बच्चे से लेकर बूढ़े तक मेरे साथ होते हैं.दूर के सफ़र में मेरे इर्द-गिर्द...

दुखवा मैं कसे कहूं मोरी सखी!!!

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प्रिय सखी सच कहती हूँ... मेरी तकदीर में सुख कम दुःख ज्यादा लिखे हैं.अक्सर सफ़र पर ही रहती हूँ.कभी शहर के भीतर तो कभी लम्बे सफ़र पर....छोटे शहर से बड़े शहर तक.कई बार मेरी यात्रा एकदम तन्हाइयों में होती है . हाँ शहर के भीतर जरूर बच्चे से लेकर बूढ़े तक मेरे साथ होते हैं.दूर के सफ़र में मेरे इर्द-गिर्द...

शनिवार, 2 जुलाई 2011

सूखी अरपा ....

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सूखी अरपा .... आज सचमुच देखा अपनी अरपा का सूखा तन कसक उठी,दुखी हुआ मनसूखी अरपा ,खोया यौवन धन    आज सचमुच देखाअरपा की पसरी रेतदूर तक फैला पाटबेजान  ,नीरव और सपाट आज सचमुच देखा  चीखती अरपा पहियों के नीचे छलनी करती लौह मशीनेंउसे बेचकर चांदी कूततेनराधमों...

शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

गूगल के संस्थापकों से आगे निकले फेसबुक के जुकरबर्ग

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गूगल के संस्थापकों से आगे निकले फेसबुक के जुकरबर्ग  सोशल नेटवर्किग साइट फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग अमीरी के मामले गूगल के संस्थापकों सर्गी ब्रिन और लैरी पेज से आगे निकल गए हैं। महज 27 साल के जुकरबर्ग 18 अरब डॉलर [करीब 81 हजार करोड़ रुपये] की संपत्ति के साथ अब प्रौद्योगिकी के क्षेत्र की तीसरी सबसे अमीर शख्सियत बन गए हैं। माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स [56 अरब डॉलर] और ओरेकल के लैरी एलिसन [39.5...

गुरुवार, 30 जून 2011

डाक्टर्स डे पर सभी डाक्टरों को बधाई

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डाक्टर्स डे आज जुलाई की पहली तारीख को है. सभी डाक्टरों को बधाई .साथ ही यह आव्हान भी की वे यह सोचें की मरीजों के साथ उनके भावनात्मक  सम्बन्ध कितने रह गए है. मेडीकल ज्यूरिसप्रूडेंस  में Doctor -Patient bonding  का विस्तृत उल्लेख किया गया है. फिल्म मुन्ना भाई एमबीबी एस  में डीन...

बुधवार, 29 जून 2011

अपनी ही साँसों का कैदी, रेशम का यह शायर

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शहतूत की शाख पे बैठा कोई                                                              बुनता है रेशम के तागे लम्हा-लम्हा खोल रहा है, पत्ता-पत्ता...

मंगलवार, 28 जून 2011

ख़ुशी का पैगाम कहीं . कहीं दर्दे जाम लाया .

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शायद इस बूढ़े बाप को मनी आर्डर भेजा हो बेटे ने..मेरा इंटरव्यू काल लेटर होना चाहिए...पप्पू  ने सोचा ... बलम परदेसिया को दुखियारी बिरहन की याद आई हो... उस भाभी का मन कह रहा था जिसके साजन नौकरी -धंधे की जुगत में दूर शहर में रहते हैं... और नजरें चुराकर चांदनी भी देखती है कहीं उसके चकोर ने गुलाबी...

सोमवार, 27 जून 2011

तुम शीशे का प्याला नहीं झील बन जाओ...

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अब तो दादा -दादी या नाना -नानी के मुह से कहानियां सुनने का फैशन ख़त्म ही हो गया है.आज कल के बच्चों  के पास इसके लिए वक्त ही नहीं होता. न वे इसमें रुचि ही लेते हैं.कम्प्यूटर तो बस बहाना है .इन्ही कहानी-किस्सों के जरिये बच्चों के मन में संस्कार डाले जाते थे. फिर भी पढने वाले लोग या तो किताबें...

हम सब इस रंगमंच की कठपुतलियां हैं...

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धू-धू कर जलती चिता... शोक संतप्त  जनों को ढाढस बंधाते शब्द और मृत्यु को प्राप्त इंसान के जीवन की यादों से जुड़े पहलुओं के बीच ही कहीं से जन्म लेता है शमशान वैराग्य.सच कहें तो मौत के एहसास से चोली-दामन का साथ है जिंदगी का.शायद जीवन के होने का अभिप्राय बोध भी करा जाता है -"मौत " इन  दो...

शनिवार, 25 जून 2011

बरगद की बातें करते है गमलों में उगे हुए लोग!!!!

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सारी जिंदगी एक ऐसी  में तब्दील हो चुकी है जिसमें कई लोग अपनी बोली लगाने हद दर्जे तक समझौते कर रहे है in!क्रिकेटरों  की मंडी में सबसे बड़ी बोली लगी थी  और बिक गए सितारा क्रिकेटर.जिसको देखो वही बिकने पर उतारू है.फ़िल्मी सितारे., अफसर, नेता, मीडिया,कर्मचारी ... अमूमन जिंदगी के सभी क्षेत्रों ...