सोमवार, 4 मई 2015

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देखा! भूल गए न सैम !पित्रोदा को !
सैम पित्रोदा का  जन्मदिन आज

आज  बच्चे से लेकर बूढ़े तक हर किसी के हाथ में मोबाइल है। 3 जी   4  जी   5 जी और न जाने क्या क्या।लेटेस्ट  गैजेट्स हैं।  वात्ज़प ,वेब कैम , इंटरनेट  और सोशल साइट्स की दीवानगी तो देखते बनती है अपने बिलास्पुर  के राजीव प्लाज़ा में तो ९० फीसदी दुकाने मोबाइल की हैं  .भारत में सूचना क्रान्ति के जनक का नाम लिया जाय  एक ही नाम है-सैम पित्रोदा।   सैम पित्रोदा ने 1984 में भारत लौटने के बाद सी-डैक की स्थापना की थी.
भारतीय सूचना क्रांति के अग्रदूत माने जाने वाले सैम पित्रोदा का पूरा नाम सत्यनारायण गंगाराम पित्रोदा है. चार मई 1942 को  ओड़िशा  के टिटलागढ़ में जन्मे पित्रोदा एक भारतीय अविष्कारक, कारोबारी और नीति निर्माता हैं.
वर्तमान में पित्रोदा भारतीय प्रधानमंत्री के जन सूचना संरचना और नवप्रवर्तन सलाहकार हैं. प्रधानमंत्री के सलाहकार के रूप में उनकी भूमिका विभिन्न क्षेत्रों में नागरिकों को मिलनेवाली सुविधाओं को प्रभावी बनाना और नवप्रवर्तन के लिए रोडमैप तैयार करना है.
पित्रोदा राष्ट्रीय नवप्रवर्तन परिषद के चेयरमैन भी हैं.
साल 2005 से 2009 तक सैम पित्रोदा भारतीय ज्ञान आयोग के चेयरमैन थे. इस उच्च स्तरीय सलाहकार परिषद का गठन देश में ज्ञान आधारित संस्थाओं और उनके आधारभूत ढांचे को बेहतर बनाने के लिए परामर्श देने के लिए किया गया था.
भारतीय ज्ञान आयोग के चेयरमैन की हैसियत से काम करते हुए पित्रोदा ने 27 क्षेत्रों में सुधार के लिए क़रीब 300 सुझाव दिए थे.

भौतिकी में स्नातकोत्तर करने के बाद इलेक्ट्रोनिक्स में मास्टर की डिग्री हासिल करने के लिए पित्रोदा शिकागो के इलिनॉय इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी गए.
साठ और सत्तर के दशक में पित्रोदा दूरसंचार और कंप्यूटिंग के क्षेत्र में तकनीक विकसित करने की दिशा में काम करते रहे. पित्रोदा के नाम सौ से भी अधिक पेटेंट हैं.
साल 1984 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पित्रोदा को भारत आकर अपनी सेवाएं देने का न्योता दिया.
भारत लौटने के बाद उन्होंने दूरसंचार के क्षेत्र में स्वायत्त रूप से अनुसंधान और विकास के लिए सी-डॉट यानि 'सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ टेलिमैटिक्स' की स्थापना की.

विज्ञान के क्षेत्र में पित्रोदा के विशेष योगदान के लिए उन्हें 2009 में पद्म भूषण से नवाज़ा गया .
उसके बाद प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सलाहकार की हैसियत के उन्होंने घरेलू और विदेशी दूरसंचार नीति को दिशा देने का काम किया.
1990 के दशक में पित्रोदा एक बार फिर अपने कारोबारी हित साधने के लिए अमरीका चले गए और लंबे समय तक वहां तकनीकी अनुसंधान का काम करते रहे.
2004 में जब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार सत्ता में आई तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सैम पित्रोदा दो फिर भारत आने का न्योता दिया और उन्हें भारतीय ज्ञान आयोग का चेयरमैन बनाया गया.
रा्ष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कारों से सम्मानित पित्रोदा को विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 2009 में पद्मभूषण से नवाज़ा गया.
1992 में पित्रोदा संयुक्त राष्ट्र में भी सलाहकार रहे. पिछले साल उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सैम पित्रोदा को ओबीसी पोस्टर ब्वाय के रूप में उतार कर नया चुनावी समीकरण बनाने की कोशिश की थी
SATYANARAYAN GANGAARAM PITRODA -popularly known as Sam Pitroda (born 4 May 1942) is a telecom engineer, inventor, entrepreneur and policymaker. He was born in Titilagarh, a poor, remote village in rural Odisha, India. In 1964, he traveled to Chicago to study electrical engineering. Pitroda had never used a telephone before arriving in the US.

After many years Pitroda visited India and could not make a phone call to his wife. So he returned to India and spent nearly a decade with Prime Minister Rajiv Gandhi as leader of an effort to build an Indian information industry. The task was to extend digital telecommunications to every corner of the country, including remote villages, like the one of his birth. Pitroda launched the Center for the Development of Telematics (C-DOT), and served as Advisor to the Prime Minister on Technology Missions related to water, literacy, immunization, oil seeds, telecom, and dairy. He is also the founding Chairman of India’s Telecom Commission.

Pitroda returned to India a second time in 2004 to focus on building knowledge institutions and infrastructure. Pitroda served as chairman of the National Knowledge Commission (2005–2009), a high-level advisory body to the Prime Minister of India, to give policy recommendations for improving knowledge related institutions and infrastructure in the country. During its term, the National Knowledge Commission submitted around 300 recommendations on 27 focus areas.

Pitroda also founded the National Innovation Council (2010), and served as the Advisor to the Prime Minister with rank of a cabinet minister on Public Information Infrastructure and Innovation, to help democratize information.

Pitroda founded and served as Chairman of C-SAM.[3] The company maintains its headquarters in Chicago with offices in Singapore, Tokyo, Pune, Mumbai and Vadodara. Pitroda holds around 100 technology patents, has been involved in several start ups and lectures extensively.
Pitroda has also started several businesses as a serial entrepreneur (Wescom Switching, Ionics, MTI, Martek, WorldTel, C-SAM, etc.) in the US and Europe.
He has also served as an advisor to the United Nations and in 1992, his biography Sam Pitroda: A Biography was published
and became a bestseller on The Economic Times list for five weeks.

As technology Advisor to the Prime Minister, Rajiv Gandhi in 1984, Pitroda not only heralded the telecom revolution in India, but also made a strong case for using technology for the benefit of society through missions on telecommunications, literacy, dairy, water, immunization and oil seeds.
Pitroda's claim of heralding the Telecom Revolution in India has been disputed in an article by Rajeev Mantri and Harsh Gupta published by LiveMint.
He has lived in Chicago, Illinois since 1964 with his wife and two children and also in Delhi.
(COURTSEY WIKIPAEDIA)
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