शनिवार, 9 मई 2015

कचरे में मिली नेत्रदान की 2000 आँखें ,महादान अभियान की मिट्टीपलीत!

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कचरे में मिली  नेत्रदान की 2000 आँखें ,महादान  अभियान की मिट्टीपलीत! बेहद शर्मनाक घटना। साथ में चिकित्सकीय तथा नेत्र दान से जुड़ी  संस्थाओं के लिए विचारणीय भी। देश व्यापी अभियान चल रहा हैं नेत्र दान -महादान का। यह मामला है हरियाणा के पीजीआईएमएस   को  नेत्र दान की...

अगर आदिवासी हिन्दू हैं तो पारम्परिक वर्ण व्यवस्था में वे कहाँ हैं?

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अगर आदिवासी हिन्दू हैं तो पारम्परिक वर्ण व्यवस्था में वे कहाँ हैं?-क्षत्रिय, ब्राह्मण , वैश्य या शूद्र? मेरे मीडिया साथी आलोक पुतुल ने फेसबुक  पर यह सवाल उठाया है। मुझे लगता है कि  आदिवासी और हिन्दू दोनों ही शब्द- उत्पत्ति और क्रमिक विकास के नजरिये से  भौगोलिक, राजनैतिक,( राजनीति समर्थित संवैधानिक ) ऐतिहासिक , मान्यताओं  और निहित स्वार्थों का शिकार भी हुए हैं। दोनों ही शब्दों...

शुक्रवार, 8 मई 2015

सच पूछो तो सब ही मुजरिम हैं कौन यहाँ किसकी गवाही दे?

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सच पूछो तो सब ही  मुजरिम हैं कौन यहाँ किसकी गवाही दे? * भारत की न्यायपालिका ने अपनी असलियत इस तरह खुल के कभी नहीं बताई थी. बिकने के लिए होड़ मचाये चार खम्भों वाले लोड-तंत्र में स्वागत है. The justice has gone to dogs, so is republic.-समर अनार्य * दुखद तो है मगर सलमान को सजा जरुर मिलेगी,-प्रकाश...

गुरुवार, 7 मई 2015

"कृषि को" विजन -2015 " का सर्वाधिक महत्वपूर्ण एजेंडा बना लेना चाहिए " मुफ्त के बजाये -"खूब काम करो ,खूब अनाज पैदा करो " की नीति पर सोचें

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"कृषि को" विजन -2015  " का सर्वाधिक महत्वपूर्ण एजेंडा  बना लेना चाहिए " मुफ्त के बजाये -"खूब काम करो ,खूब अनाज पैदा करो  " की नीति पर सोचें क्या सचमुच में जमीनी स्तर पर कोई किसान नेता है? क्या सरकार कृषि  क्षेत्र  के प्रति गंभीर दीखती हैं? क्या खेतिहरों ( पुरुष व् महिला...

बुधवार, 6 मई 2015

कृत्या कविता की पत्रिका

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  कृत्या कविता की पत्रिका है, जो हिन्दी सहित सभी भारतीय  एवं वैश्विक भाषाओं में लिखी जाने वाली आधुनिक एव प्राचीन कविता को हिन्दी के माध्यम से प्रस्तुत करती है। यह इन्टरनेट के माध्यम से साहित्य को जन सामान्य के सम्मुख लाने की नम्र कोशिश है। इसका उद्देश्य हिन्दी भाषा के प्रति सम्मान जगाना भी है.मेरी अनूदित कविताओं के प्रकाशन हेतु आभार ,रति सक्सेना जी http://www.kritya.in/0905/hn/ou...

सेलिब्रेटी और आम आदमी की औकात का फर्क!

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सेलिब्रेटी और आम आदमी की औकात का फर्क! हैल्लो। । हैल्लो सल्लू बोल रहा हूँ। 1  बजकर 35  मिनट की दोपहर का वक्त. क्या! मैं चौंक गया। … सेल फोन की स्क्रीन को घूरा। लिखा था दद्दू। इससे पहले कि मैं कुछ बोलता, दद्दू बोल उठे ," यार अखबार नवीस , सल्लू हिट एंड रन केस में अंदर हो गयेला है।...

मंगलवार, 5 मई 2015

"दद्दू चले छत्तीसगढ़ के सी एम रमन सिंह से मिलने!"

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"दद्दू चले छत्तीसगढ़ के सी एम रमन सिंह से मिलने!" " जा रहा हूँ मैं सीएम डॉ रमन सिंह से मिलने "- दद्दू ने मुझसे मिलते ही धम्म से गोला  दागा । । मैंने पूछा ," क्या हुआ दद्दू! पैसे -कौड़ी की  मदद..... या फिर नेतागिरी  का चक्कर?. "नहीं अखबारनवीस,स्मार्ट शहर का भोंपू जोर-शोर से बज रहा...

सोमवार, 4 मई 2015

जिंदगी का आर्थिक फलसफ़ा : कालजयी हैं कार्ल मार्क्स :

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 जिंदगी का आर्थिक फलसफ़ा : कालजयी हैं कार्ल मार्क्स :  मार्क्स  एक सिद्धांत शैली अवधारणा और फ़लसफ़ा है। अगरचे एक   जिंदगी हैं मार्क्स कहा जाय तो अतिरंजना  नहीं होगी। मार्क्स को   समझना जिंदगी को  भी समझना है। मार्क्स  के सूत्र एक दिशा है।  समयअनुसार ...

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देखा! भूल गए न सैम !पित्रोदा को ! सैम पित्रोदा का  जन्मदिन आज आज  बच्चे से लेकर बूढ़े तक हर किसी के हाथ में मोबाइल है। 3 जी   4  जी   5 जी और न जाने क्या क्या।लेटेस्ट  गैजेट्स हैं।  वात्ज़प ,वेब कैम , इंटरनेट  और सोशल साइट्स की दीवानगी तो देखते बनती है अपने बिलास्पुर...

अत्तदीप भव।।

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 अत्तदीप भव।। क्या समाज इसे सच्चे  दिल  से स्वीकार रहा  है? हाँ? नहीं?  ?कैसे? सिद्धार्थ , बोधिवृक्ष के नीचे बुद्ध बन गए। क्या  हमने /आपने / किसी  ने "  बोधिवृक्ष " (?) की तलाश की? क्या हो सकता है आज  के  इंसान का बोधि वृक्ष? वक्त  मिला जिंदगी...

शनिवार, 2 मई 2015

घर पडोसी का महक जाए चमन की सूरत तेरे आँगन से मुहब्बत की वो खुशबू निकले! अपने दद्दू से बात हो रही थी मकान के मसले पर. बोले ," यार कलम घसीटू!रोटी ,कपड़ा और मकान बुनियादी जरूरतें हैं. यार दद्दू! जे कौन सी नयी बात कह दी? मैंने कहा। दद्दू बोले , नहीं! मेरे कहने का मतलब ये की जो लोग मकान नहीं बना पाते या फिर जिनके मकान ढह जाते हैं भूकम्प जैसी विपदा में उन्हें कितनी मुश्किल होती होगी नई क्या? नया मकान बनने में न जाने कितना वक्त लग जाता है! सरकार के अच्छे दिन न जाने कब आते हैं, आते हैं भी या नहीं! बात सही है दद्दू! एकड़ तो मकान बनाना कितना लोहे के चने चबाना हो गया है इस महंगाई के जमाने में। उसपर अगर कही भूकम्प जैसी तबाही बच जाए तब तो हालत यूं हो जाते हैं मानो -- दीवारें क्या गिरी मेरे मकान की लोगों ने आने जाने का रास्ता बना लिया रास्ता बनाने की बात करते हो दद्दू, मैंने छेड़ा," मुंबई जैसे शहर में कई बीड़ू तो मकान सा सपना देखते देखते गुमनामी में खो जाते हैं । आशियाना मिल जाए तो खुशनसीबी वर्ना !और तो और कई दफे तकदीर और तदबीर का खेल यूं होता है की समंदर बाँधने के लिए चले इंसान का घे पहली बारिश ही उजाड़ देती है. सलीम अख्तर के दर्द के इस अंदाज में - मैं समंदर बाँधने निकला था बस्ती छोड़कर क्या खबर थी पहली बारिश मेरा घर ले जायेगी! जो भी हो सच कहूँ तो मकान छोटा हो या बड़ा वो अपना घर होना चाहिए। जीवंत जहाँ पर रिश्ते जिए जाते हैं। दूसरे शब्दों में ईटों और दीवारों से नहीं घर तो उसमें रहने वालों से बनता है। " घर के साथ आँगन भी कितना अच्छा लगता है अखबार नवीस!" दद्दू ने चोंच खोली "यार आजकल तो अपार्टमेंट का ज़माना आ गया है। आँगन मिले तो ठीक न मिले तो भी ठीक! जरूरी बात बोले तो- मेरी ख्वाहिश ये है कि आँगन में न दीवार उठे मेरे भाई मेरे हिस्से की जमीन तू लेले! मेरी भावनाओं को समझो दद्दू! वर्ना आजकल तो जमीन और मकान के लिए भाई -भाई और परिवार में न जाने कितने सर फुटौव्वल होते हैं।बहरहाल मकान के मसले पर तो कहने को काफी कुछ है पर अपना मकान जब भी बने, छोटा हो या बड़ा हो। .... अपनी जरूरतों के बरक्स बनायें फकत इतना ख्याल रखिये क़ि - घर पडोसी का महक जाए चमन की सूरत तेरे आँगन से मुहब्बत की वो खुशबू निकले! मैंने शेर कहा और दद्दू ने इसे गुनगुनाते हुए मुझसे विदा ली।

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घर पडोसी का महक जाए चमन की सूरत तेरे आँगन से मुहब्बत की वो खुशबू निकले!-1 अपने दद्दू से बात हो रही थी मकान के मसले पर. बोले ," यार कलम घसीटू!रोटी ,कपड़ा और मकान बुनियादी जरूरतें हैं. यार दद्दू! जे कौन सी नयी बात कह दी? मैंने कहा।  दद्दू बोले , नहीं! मेरे कहने का मतलब ये की जो लोग मकान नहीं...

शुक्रवार, 1 मई 2015

अनुसन्धान के क्षेत्र में बिलासपुर का गौरव -समीक्षा वासनिक

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"कड़ी मेहनत और लक्ष्य तय कर काम करने से सफलता जरूर मिलती है" अनुसन्धान के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का गौरव -समीक्षा वासनिक "मुझे हमेशा प्रतिस्पर्धात्मक और चुनौती भरे माहौल में काम करना पसंद रहा है। कड़ी मेहनत और लक्ष्य तय कर काम करने से सफलता जरूर मिलती है"- समीक्षा वासनिक। छोटी सी कद काठी की इस युवती में अनुसन्धान की असाधारण प्रतिभा छिपी थी जो आज उसे बिलासपुर से आस्ट्रेलिया होते हुए केलिफोर्निया...