शुक्रवार, 25 मई 2012

.खबरदार .. पंखदार अफवाहें गिराती हैं बिजलियाँ....

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खबरदार .. पंखदार अफवाहें गिराती हैं बिजलियाँ....

किटी  पार्टी में श्रीमती बडबोले ने एक अफवाह मिसेज मंथरा  के कानों में कही.कुछ ही दिनों के बाद वह अफवाह समूची कालोनी में फ़ैल गयी.जिसके बारे में वह अफवाह थी वह बड़ी दुखी हुई.बाद में श्रीमती बडबोले को पता चला की अफवाह बेसिर -पैर थी....सफ़ेद झूठ. तब माथे पर हथेली मारकर बोली-" हाय राम! मैंने ये क्या कर डाला!"
              श्रीमती बडबोले को बहुत बुरा लगा( हालाकि  इस आदत की महिलाओं को नहीं लगता.)वह स्वामी मुक्तानंद के पास गई।
.और उनसे पूछा,"स्वामीजी! मेरी फैलाई हुई अफवाह से किसी के दिल पर चोट पहुंची है बताइये  मैं इसका प्रायश्चित्त कैसे करू?मैं सचमुच दुखी हूँ .
" ऐसा  करो... तुम बाजार जाओ.  एक मुर्गा खरीदना और उसे मार  डालने के लिए कहना .फिर मरे हुए मुर्गे को हाथ  में लेकर वापस अपने घर लौटना .लेकिन खबरदार!पूरे रास्ते भर एक-एक पंख नोंचकर सड़क पर डालती जाना.श्रीमती बडबोले इस सलाह से भौचक थी पर उसने वही  किया जो उससे कहा गया था.दुसरे दिन वह स्वामी मुक्तानंद के पास पहुंची. प्रणाम और आशीर्वचन की औपचारिकताओं  के बाद स्वामीजी ने मुस्कुराते हुए कहा,"भद्र महिला.. अब तुम जाओ और वे सारे पंख चुनकर वापस ले आओ जो तुमने कल  फेंके थे.वे सारे पंख मुझे लाकर देना .
                      काफी दूर चलने के बाद भी श्रीमती बडबोले को कोई पंख नहीं मिला." उफ़! न जाने वे सारे पंख कहाँ चले गए." ... वह खीझकर कहने लगी.कई घंटों की तलाश के बाद उसे सिर्फ तीन पंख हाथ लगे." तुमने देखा! उन पंखों को नोंचकर बिखेरना कितना आसान  था ?लेकिन उसे वापस लेना  कितना कठिन!" अपनी ओढ़नी  के सिरे से पसीना पोंछती श्रीमती बडबोले से स्वामी जी बोले.कहानी का क्लाइमेक्स अभी आने को ही था की अपने दद्दू ने तपाक  से बीच में चोंच मारी.,"भाई अखबारनवीस!ये तो बताओ फिर क्या हुआ?
                       "होना क्या था दद्दू!स्वामी जी ने श्रीमती बडबोले को समझाइश दी की किसी अफवाह को फ़ैलाने में अधिक समय नहीं लगता.एक बार आपने अफवाह फैलाई की बन्दूक की  तरह..... जंगल में आग की तरह फैलती है अफवाह.इससे होने वाले नुकसान का पूरो तरह प्रायश्चित्त नहीं कर सकते." लेकिन अखबारनवीस!क्या अफवाहबाज सिर्फ महिलाएं होती हैं?इन पर तो हमेशा आरोप लगता आया है कि  उनके पेट में कभी कोई बात नहीं पचती.आजकल मर्द तो इस मामले में महिलाओं से काफी आगे निकल चुके हैं.देखते नहीं!.. आफिस-आफिस, संस्थानों में काफी हाउस या गपोड़ियों के अड्डों पर किस तरह अफवाहों की मिसाइलें उडा  करती है?"दद्दू ने नया पासा फेंका.( बाद में पप्पू  से पता चला कि  श्रीमती जी को अफवाहबाज कहने पर उन्हें बेल्नास्त्र का प्रहार सहन करना पड़ा था।)
                        दद्दू के सर पर उमड़े गूमड़ को देखकर अखबारनवीस ने मुस्कुराते हुए कहा,"भाई दद्दू! अफवाहें सचमुच परेशानियों में डालती ही हैं.कानाफूसी से पैदा हुई अफवाहें मन और चरित्र पर भी असर डालती हैं.संस्थानों में भी कुछ अघोषित(?) पट्टे दार  इस काम के लिए शाबासी  हासिल करते हैं .वास्तव में देखा जाये तो अफवाहबाजी किसी के लिए शौकिया तो किसी के लिए चरित्र की खासियत बन जाती है.यकीन मानो , जो इंसान अफवाहों पर तत्काल भरोसा कर लेता है वह उसे फ़ैलाने का पहला दोषी है.सच कहूं  तो यह देखना  और महसूस करना कितने हैरत की बात  है की किस  तरह कुछ लोग अफवाहबाजी के चलते चरित्र और खुशियों को बर्बाद करते हैं।"
                            ठीक कह रहे हो अखबारनवीस! बच्चों को कई बार यह कहकर भरमाया जाता है," वो देखो! कौवा कान ले गया.आसमान गिर रहा है....सारे जानवर भागने लगते हैं  .पर कभी आसमान गिरता है क्या? खैर! चाय की चुस्कियों के साथ किस्सेबाजी का दौर ख़त्म हुआ ही था कि  महरी अपना एक हाथ कमर पर और दूसरा नचा-नचाकर र्रिम्तीजी से कह रही थीं," मैडम जी।.. मैडम जी! मंथरा  मैडम जी से किसी ने कहा  मालूम....शुक्रवार की रात को नौ बजे उत्तर दिशा में नीली रौशनी वाला एक तारा चमककर दक्षिण की और जायेगा  .उसे देखकर सवा किलो मिठाई जो ब्रह्मण को दान करेगा उसे एक सप्ताह के भीतर खूब धनराशी प्राप्त होगी . 
                   
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