शनिवार, 19 मई 2012

उजड़े चमन बनाम तेरी जुल्फों की याद आई

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उजड़े चमन बनाम तेरी जुल्फों की याद आई


उन्होंने अपनी गंजी चाँद पर प्यार  से हाथ फेरा और दसों अँगुलियों के नाखूनों को रगड़ते हुए बापू की फ्रेम की और देखकर लगे थे कुछ सोचने।" क्या बात है दद्दू!बाबा रामदेव का फार्मूला आजमा  रहे हो क्या?"-ड्राइंग रूम में एंट्री मारते हुए मैंने उन्हें छेड़ा।अपनी गंजी चाँद की कसम... अखबारनवीस इन नामुराद जुल्फों ने थोड़ी सी नहीं,...बहुत बड़ी सी बेवफाई की है मुझसे .तब मुझे लगा क्यों न यही फार्मूला ट्राई करें!मैंने भी सोचा चलो आज गंजत्व पर ही चकल्लस कर ली जाये।
                               दद्दू।.. तकदीर वाले हो ...बालों को सँवारने में समय बर्बाद नहीं होता वर्ना हमें तो आईने के सामने देर तक खड़ा देखकर श्रीमती जी की  त्योरियां ही चढ़ जाती हैं-" इस उम्र में इतनी देर मेक अप  ... आपके कानों पर जूं क्यों नहीं रेंगती ?" अचानक यह डायलाग  याद आया और हमारी निगाह पड़ी दद्दू की चाँद पर।... भला सर पर बाल हों तो जू  रेंगने की हिमाकत करे ना !पर ... अखबारनवीस।.. पुरुष अगर घुटा सर हो तब उसे गंजा कहते हैं लेकिन ऐसी महिला को " गंजी  कहते हैं या नहीं?मैंने कहा किसी खल्वाट  साहित्यकार को पूछ कर बताऊँगा।!
                       स्कूल जाने वाली दद्दू  की बिटिया बबली अचानक अपने पापा के पास कहने लगी," पापा आपके सर पर तो बाल ही नहीं हैं फिर आप जेब में हमेशा कंघी क्यों रखते हैं?"दद्दू हमारी और देखकर मुस्कुराये और झेंपकर कहा,"" जा बिटिया।..अंकल के लिए पानी लेकर आना!" "और सुनाओ दद्दू! क्या खबर है?? "खबर नहीं
मजेदार बात सुनो अखबारनवीस।." चहकते हुए उन्होंने बताया,"आज गया था कटिंग करने।मेरे बैठे हुए शरीर  पर कपडा लपेटकर  कंघी बजाता  हुआ दो-तीन मिनट इर्द-गिर्द प्रदक्षिणा करता रहा " तब मैंने झुंझलाकर कहा ," यार! क्यों बोर  कर रहे हो!फटाफट बाल काटो ... कई काम पड़े है ना अभी  करने के!" साहब .. आपकी चाँद को देखकर सोच रहा हूँ किधर से शुरू करूं  , गिने  चुने ही तो बाल हैं" मैंने ( दद्दू) में  सोचा ,लगता है किसी झुल्पहा नौजवान के बाल काटने के बाद थका हुआ यह ड्रेसर मुझ जैसे उजड़े चमन के जरिया अपना "लास " अडजस्ट करने की सोच रहा है.इसी बीच बनती एन टीवी का स्विच आन किया और एक हसीं खूबसूरत शायरा की खनकती आवाज गूंजने लगी-
                           जुल्फों की याद से दद्दू को मैंने बाहर खींचते  हुए कहा,"यार दद्दू! खोपड़ी अगर गंजी है तो अफ़सोस क्यों करते हो आजकल तो यह फैशन में भी शुमार हो गया है.भूल गए क्या!फिरोज खान को नहीं देखा...कई गंजे खिलाडी मैदान पर गंजे होकर खेलते हैं.तिरुपति जाकर केश दान की परंपरा है.सलमान खान भी एक बार मुंडी घुटाकर अवार्ड समारोह में पहुंचा था.रेखा और शबन आजमी ने भी सर मुड़कर परम्पराओं की बगावत की थी.हमारी बातों से दद्दू की कुछ हौसला अफजाई हुई और उनकी घुटी चाँद फोर्टी की बजाये सिक्सटी वाट के बिजली के लट्टू की तरह चमकने लगी.यकायक दद्दू और मेरी निगाह टीवी स्क्रीन की तरफ गयी." पड़ोसन" के किशोर कुमार वाली अदा से एक शायर ने अपनी जुल्फों को झटका दिया और आशिक मिजाजी के फूल बिखेर दिए.-
                                     तेरे हुस्न से जो संवर  गयी फिजायें मुझको अजीज हैं
                                      तेरी जुल्फ से जो लिपट  गयी मुझे उन हवाओं से प्यार है
मेरे एक ज्योतिषी मित्र भी उजड़े चमन हैं.सर के दस परसेंट बचे-खुचे बालों की सुरक्षा के लिए उन्होंने कंघियों की बटालियन रख छोड़ी है.नहाते  वक्त शेम्पू लगाकर बिग बी स्टाइल में पोलियो ड्राप्स वाले विज्ञापन को नए अंदाज में पेश करते हैं," दो बूँद शेम्पू की.. बस...!!"" उनका बेटा भी कुछ दिन पहले कह रहा था," अंकल जी इस बार मैंने अपने पापा को बर्थ डे पर हम सब मिलकर अच्छी सी विग देने वाले हैं.".
                               विग की बात होनी थी की दद्दू उछल पड़े.मुझे पूरा यकीन था की दद्दू को फिर कोई किस्सा  याद आ गया .मेरे कुछ कहने से पाजले ही उनहोंने चोंच खोली ," अखबार नवीस! मेरे एक मित्र सीनियर कलाकार हैंजो विग लगते हैं.बता रहे थे ,एक रोज बेहद भन्नाई श्रीमतीजी ने मेरे बाल पकड़ लिए .यह तो किस्मत अच्छी है की हम अपनी चाँद पर विग लगाये हुए थे .मुई विग उनके हाथ में रह गयी . हमने अपनी खोपडिया खुजाते हुए वहां से नौ-दो-ग्यारह होने में ही अपनी भलाई समझी.
                                 इसी बीच दद्दू के दोनों शरारती बच्चों बनती और बबली ने मेरे मेरे एक-एक कान में फुसफुसाकर कहा," अंकल जी!कल एक सेल्समेन आया था.वह पापा को बीस रूपये में तीन कंघी बेचकर चला  गया.कह रहा था," यह तो हमारी सेल्समेन शिप का कमाल है ... हमतो गंजों को भी कंघी बेच लेते  हैं."
बातों ही बातों में मुशायरा कुछ और आगे बढ़ चुका था.इस बार टीवी पर एंकर ने माहौल बनाने ग़ालिब का शेर दागा-
                                       आह को चाहिए  एक उम्र असर होने तक
                                       कौन जीता है तेरी जुल्फ के सर होने तक?
चाय  की प्याली के साथ ही गंजत्व और गंजावाद पर चर्चा के साथ ही गंजा-पूरण के कई और पन्ने पलटने लगते हैं.विदेशों में कुछ अभिनेत्रियों को गंजे मर्द बड़े सेक्सी लगते हैं.कास्मेटोलोजी में गंजेपन की इंजीनियरिंग और कृत्रिम केशरोपण पर रिसर्च का पूरा ब्यौरा दिया गया है.मैं दद्दू से बातें कर ही रहा था की बंटी ने अपने पापा को झिंझोड़ते हुए पूछा,"पापा! गंजों को  नाखून क्यों नहीं होते?" बबली की नजरें अपने पापा के नाखूनों पर थी.बहरहाल उजड़े चमन होने का नफा-नुक्सान और पूरे सेन्स आफ ह्यूमर के साथ अपने पूरे परिवार और दोस्तों में गप -सडाके के दौरान बांटिएगा...और हां.. अपने मोबाइल पर एस एम् एस का इन्तेजार करें.. गंजों का सम्मेलन होने वाला है.अपने शहर में ... लेकिन तब तक सुनिए ... ये शायर क्या कह रहे हैं-
                                         इस शहर के बादल तेरी जुल्फों की तरह हैं
                                         जो आग तो लगते हैं,बुझाने नहीं आते!
                                                                                                      अपना ख्याल रखिये ...
                                                                                                                          किशोर दिवसे
                                       
                 
                               
       
                                   
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