बुधवार, 19 जनवरी 2011

हे प्रभु.. तू इन्हें माफ़ कर ....

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अन्थोनी गोंजाल्विस... हाँ... ट्रेन में सफ़र के दौरान उसने अपना यैच्च नाम बताया था.पता नहीं था मुसाफिराना अंदाज में हुई यह मुलाकात दोस्ती में बदल जाएगी.आज वही अपुन का दिलदार दोस्त अन्थोनी गोंजाल्विस घर आएला था.अक्खा साल भर बाद अपुन का यार अन्थोनी आएला है और खाली-पीली भंकस करने के साथ-साथ दिल खोलकर रख दिया था हम दोनों ने.मेरी सुनने के बाद जब अन्थोनी की बारी आई तब उसने अपने एक रिश्तेदार जान डीकोस्ता का किस्सा सुनाया.
                       बोले तो जान रईस खानदान का औलाद.जान ग्रेजुएट होने जा रहा था.रास्ते पर एक शो रूम में उसे एक स्पोर्ट्स कर बेहद पसंद आई थी.वह जानता  था कि उसका डैडी उसे यह कार खरीद कर दे सकता है.उसने अपने दिल की बात डैड को बताया.ग्रेजुएशन के रिजल्ट वाले दिन जान को पक्का भरोसा था कि डैड वह कार तोहफे में देंगा.उस रोज डैड ने उसे बुलाया था और कहा," माई सन !! तुम्हारे जैसे बेटे को पाकर हम कितना प्राउड फील करता है यह मेरा दिल ही जानता है.डैड उससे बेहद प्यार करता है.इतना कहकर जान को उसके डैड ने रंगीन चमकीली जिल्द लगा गिफ्ट बाक्स दिया.जान हैरान और दुखी था.उसने जब वह बक्सा खोला ,उसमें चमड़े का कव्हर लगी  एक बाइबल  थी जिसपर सुनहरी इबारत में लिखा था ," तू जान विथ लव." न जाने कैसे जान का गुस्सा फट पड़ा.," डैड!गिफ्ट में क्या यही बाइबल दे रहे हो?कोई अच्छा तोहफा नहीं दे सकते थे?आग बबूला होकर वह अपने घर से जो निकला फिर लौटकर नहीं आया.
                 एक-एक कर कई साल बीतते गए.जान गोवा में बिजनेस करने लगा था.गाड की दुआ से सक्सेस भी हुआ.... घर बनाया...शादी भी बनाया.एक दिन यूं ही उसकी वाइफ शर्ली ने कहा," जान! कभी डैड को देखने का मन नहीं करता?" " हाँ शर्ली कई साल हो गया,सन्डे को जाकर देख आऊँगा." फ्राइडे का दिन था वह.
                           अचानक सैटरडे को एक टेलीग्राम पहुंचा.खोलकर देखा तो लिखा था," योर डैडी एक्सपायर्ड ,कम  सून."फ़ौरन ही वे लोग मुंबई से गोवा पहुंचे.सब कुछ ख़त्म हो गया था.फ्यूनरल होने के बाद जब घर पर यूं ही कुछ कागजात पलट रहा था तब जान को पता चला कि डैड ने  सारी वसीयत उसके नाम कर दी थी.किताबों के शेल्फ में अचानक उसकी नजर पड़ी-अरे! यह तो वही बाइबल है चमड़े के कवर से ढकी हुई.उसने भारी मन से कुछ पन्ने पालते.डैडी ने बाइबल कि कुछ लाइनों को अन्डर लाइन किया था.उसमें  लिखा था  -
                       Matt: 7;11     And if ye being evil know how to give good gifts to your children,how much more shall your hevenly father which is in heavengive to those who ask for it?"
                         जैसे ही जान ने ये शब्द पढ़े एक चाबी बाइबल से नीचे खिसक कर गिरी.उसमें उसी डीलर के नाम का कार्ड लगा हुआ था.जिसके शो रूम में उसने स्पोर्ट्स कर  देखी थी.उसी कार्ड पर जान के ग्रेजुएशन का दिन और तारीख के अलावा यह भी लिखा था  PAID IN FULL यानी पेमेंट हो चुका है.जान की आँखों से बहते आसुओं को बाइबल ने अपने सीने में यूँ छिपा लिया था जैसे दुखियों का दर्द जीसस अपने सीने में .शर्ली ने जैसे ही जान के कंधे पर हथेली रखी फफककर रो पड़ा था जान.शर्ली ने उसे ढाढस दिलाया.
                                आखिर हम कितनी बार प्रभु के आशीष को दरकिनार कर जाते हैं?सिर्फ इसलिए की वे उस रूप में हमारे सामने नहीं आते जैसा की हम चाहते हैया हमें उम्मीद होती है.हमें यह सोचना चाहिए की जो सुख हमारे पास है उसे क्या सिर्फ यूं ही तबाह होने दे क्यूंकि हमने कुछ  और  ज्याद इच्छाएँ पालरखी थी .? जो आपके पास है उसे महसूस करें.हो सकता है की आपने जो चाहा वह आने वाले समय में और बेहतर पॅकेज में मिले!
                                दद्दू बोले," यूं आर राईट अन्थोनी.हम छोटे -छोटे सुखों को अपनी बड़ी आकांक्षाओं के नीचे कुचल देते हैं.छोटे-छोटे सपनों और सुखों को जीना सीखें... उनकी सराहना करें.अगर जान में सब्र होता तब ऐसा  दुःख क्यूं होता?छोटे सुखों के रास्ते हम बड़े सुखों से जुड़ने लगते हैं.ये हमें स्नेह और लगाव के लम्बे रास्ते पर ले जाते हैं.दरअसल जान के मन में सब्र या पेशंस नहीं था.किसी ने सच कहा है," सहनशक्ति या धीरज अक्सर किसी वजह से मिली असफलता को सफलता में बदलने में मददगार होती  है लेकिन सहनशक्ति नहीं रही तब अछे से अच्छा शक्तिमान भी अपनी ताकत को बेसब्री से तबाह कर देता है "
                                                           अपना ख्याल  रखिए
                                                                                  किशोर दिवसे 

                       
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4 टिप्‍पणियां:

  1. सोच अपनी-अपनी, तरीका अपना-अपना. पुनः आग्रह, शब्‍द पुष्टिकरण हटाने पर विचार करें.

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  2. राहुल भाई, शब्द पुष्टिकरण के सन्दर्भ को कृपया विस्तृत रूप से व्याख्यायित करे. इससे मुझे समझने और खुद को सुधारने में आसानी होगी.मै इसके सकारात्मक (यदि हो तो ) और नकारात्मक पहलुओ को जानना चाहता हूँ. वैसे रिफ़रेंस कोट करने के पीछे मेरी भावना मेरे कथन को मजबूत बनाने की है. लेकिन इसका यह मतलब नहीं लिया जाना चाहिए कि मै कमजोर कथ्य को महिमामंडित करना चाहता हूँ. मैआपकी बात को समझकर इम्प्रोवाइज करना चाहता हूँ.

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  3. शब्‍द पुष्टिकरण, टिप्‍पणी के लिए न कि पोस्‍ट के लिए. आपने देखा होगा कि टिप्‍पणी पोस्‍ट बरने पर सीधे पोस्‍ट होने के बजाय wotd verification मांगता है, इससे असुविधा महसूस होती है. पोस्‍ट पर ऐसा कुछ कतई नहीं है.

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