सोमवार, 24 जनवरी 2011

गणतंत्र दिवस मनई ले पर क्या जिगर में लगी आग है.

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लो आ गया एक और गणतंत्र दिवस!मालूम है ,क्या तोप मार लोगे आज के दिन!टीवी या मैदान पर सन्देश और राज्यों के विकास का " अर्ध सत्य "  बताने वाली झांकियां देखोगे?कर्मचारी इस जुगाड़ में होंगे कि कैसे  लगातार और छुट्टियों का जुगाड़ हो जाए.वैसे शुक्र, शनि या सोम ,मंगल को गणतंत्र दिवस आए तो यह जुगाड़...

मिले सुर मेरा तुम्हारा ,तो सुर बने हमारा...

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आज  एकाएक टीवी चैनल पर जब पंडित भीम सेन जोशी के निधन की खबर सुनी .आंखों के सामने उनकी  गीत -संगीत यात्रा चल-चित्र की तरह घूमने लगी.अपनी रूचि के अबूझ पहलुओं को जानने -समझने की उनकी ललक कभी कम नहीं हुई बल्कि सदा बढती ही रही.पंडित जोशी को प्यार से "संगीत का हाई कमिश्नर " कहा जाता था.जीवन और संगीत...

रविवार, 23 जनवरी 2011

कश्ती के मुसाफिर ने समंदर नहीं देखा

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मान लो के दुनिया अगर समंदर है तब आप और हम कश्तियाँ ही तो हुए !हमारा जमीर पतवार की भूमिका अदा करता  है .खुदा  और नाखुदा (नाविक )की अपनी-अपनी अहमियत होती है.किसी की भी हो ,जिन्दगी है तब समंदर की तरह उसमें तूफ़ान आयेंगे ही.और यही वक्त होता है जब हम सब ईश्वर या खुदा तथा नाखुदा को जिन्दगी के आईने...

बुधवार, 19 जनवरी 2011

हे प्रभु.. तू इन्हें माफ़ कर ....

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अन्थोनी गोंजाल्विस... हाँ... ट्रेन में सफ़र के दौरान उसने अपना यैच्च नाम बताया था.पता नहीं था मुसाफिराना अंदाज में हुई यह मुलाकात दोस्ती में बदल जाएगी.आज वही अपुन का दिलदार दोस्त अन्थोनी गोंजाल्विस घर आएला था.अक्खा साल भर बाद अपुन का यार अन्थोनी आएला है और खाली-पीली भंकस करने के साथ-साथ दिल खोलकर रख दिया था हम दोनों ने.मेरी सुनने के बाद जब अन्थोनी की बारी आई तब उसने अपने एक रिश्तेदार जान डीकोस्ता...

सोमवार, 17 जनवरी 2011

आदमी वो है जो खेला करे तूफानों से

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" सभी कार्यों में सफलता पूर्व तैयारी पर निर्भर करती है.पूर्व तैयारी के बगैर निश्चित रूप से असफलता हाथ लगती है."- कन्फ्यूशियस  यह कथन मुझे सौ फीसदी खरा उस समय लगा जब मैंने पीएस सी की परीक्षा पास करने वाले होनहार युवक-युवतियों के इंटरव्यू अखबारों में पढ़े थे.रोक्तिमा राय ,फरिहा मतीन,दीपक अग्रवाल,अरविन्द...

अगर कभी हसबैंड स्टोर खुल गया तो???

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अगर कभी हसबैंड स्टोर खुल गया तो??? डोंट बी संतुष्ट... थोडा विश करो.. डिश करो...हालाकि यह पंच लाइन किसी ऐसे विज्ञापन की है जिसमें शाहरूख खान कुछ प्रमोट करना चाहते हैं लेकिन यूं लगता है कि इसकी थीम महिलाओं को मद्दे नजर रखकर सोची गई है". " बात कुछ हज़म नहीं हुई ... जरा और खुलासा करो" मेरी छोटी सी बुद्धि...

महंगाई डायन खाए जात है!!!!!!

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 महंगाई डायन खाए जात है... दोस्तों .. महंगाई डायन खाए जात है. ह़र बन्दा इस हकीकत  को भुगत रहा है.अपने -अपने घरों में बैठकर हम सब बेतहाशा कोस लेते हैं महंगाई को.जन-जिहाद का कहीं पर नाम-ओ- निशाँ तक नही है.आज सुबह से इण्डिया टीवी ने इस मुद्दे को खूब उभारा है. कागजी शेर बने सामाजिक संगठन मिलजुलकर महंगाई के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकते क्या? मुझे  धार्मिक आस्था से कोई परहेज नहीं लेकिन ...

मंगलवार, 11 जनवरी 2011

फौलाद का टुकड़ा और कपूर की टिकिया

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बरसात की एक रात थी.बिजली गुल थी और घुप्प अँधेरे में शमा जल रही थी.गोया कि मोम के बदन से धागे का जिगर जल रहा था.इधर हवा का एक झोंका आया और तकरार शुरू हो गई उन दोनों के बीच. "तिल -तिल कर जल रही हूँ मैं.... तभी तो यहाँ पर स्याह लिबास को चीरने के लिए रोशनी है.... लेकिन तुम क्या जानो पल-पल-जलने के दर्द को...

सोमवार, 10 जनवरी 2011

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सिर्फ वक्त ही समझता है प्यार में छिपा ऐश्वर्य ७:४५ पूर्वाह्न  KISHORE DIWASE"दद्दू अभी मेरे पास नहीं हैं....प्रोफ़ेसर प्यारेलाल शहर से बाहर हैं.बाबू मोशाय कोलकाता गए.चिकनी चाची महिला मंडल में पंचायत कर रही है.दोस्तों के साथ मस्ती के मूड में किसी फास्ट फ़ूड कोर्नर में मस्ती कर रहे होंगे...

रविवार, 9 जनवरी 2011

सिर्फ वक्त ही समझता है प्यार में छिपा ऐश्वर्य

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"दद्दू अभी मेरे पास नहीं हैं....प्रोफ़ेसर प्यारेलाल शहर से बाहर हैं.बाबू मोशाय कोलकाता गए.चिकनी चाची महिला मंडल में पंचायत कर रही है.दोस्तों के साथ मस्ती के मूड में किसी फास्ट फ़ूड कोर्नर में मस्ती कर रहे होंगे बंटी और बबली.और तो और देवर्षि नारद भी नहीं जो पंखिल शब्दों के बादलों पर सवार होकर मेरे सामने...