गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

नए साल में हम करें एक नयी शुरुआत आओ कस कर थाम लें उम्मीदों के हाथ

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नए साल में हम करें एक नयी शुरुआत आओ कस कर थाम लें उम्मीदों के हाथ अंदाज हर बरस के बीतने का कुछ अलहदा होता है .इस बरस के बीतने की दुपहरी छत्तीसगढ़ के निकाय चुनावों के सिलसिले में टीवी स्क्रीन पर  नज़रे गड़ाए गुजर  रही थी .  भाजपा का भगवा रंग धूमिल होने और कांग्रेस के चेहरे पर मुस्कान...

शनिवार, 26 दिसंबर 2015

मोदी बन गए बेनजीर ! या अँधेरे में तीर !

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मोदी  बन गए बेनजीर   ! या अँधेरे में तीर ! बिरियानी टू बर्थ डे डिप्लोमेसी..,गुडविल दौरा..गिफ्ट और .सरप्राइज डिप्लोमेसी ...ब्रेकफास्ट काबुल में , लाहौर में चाय ,.....क्रिसमस के दिन चौकाने वाली यात्रा के बरक्स सचमुच का बड़ा दिन .....और अपने -अपने नजरिये का तूफ़ान  और जिन लाहौर...

मोदी बन गए बेनजीर ! या अँधेरे में तीर !

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 मोदी  बन गए बेनजीर   ! या अँधेरे में तीर ! बिरियानी टू बर्थ डे डिप्लोमेसी..,गुडविल दौरा..गिफ्ट और .सरप्राइज डिप्लोमेसी ...ब्रेकफास्ट काबुल में , लाहौर में चाय ,.....क्रिसमस के दिन चौकाने वाली यात्रा के बरक्स सचमुच का बड़ा दिन .....और अपने -अपने नजरिये का तूफ़ान  और जिन लाहौर...

शनिवार, 12 दिसंबर 2015

किसान नेता शरद जोशी होने का मतलब....

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किसान नेता शरद जोशी होने का मतलब.... निधन पर विशेष जुझारू किसान नेता शरद जोशी नहीं रहे .वैसे भी देश में कृषि और किसानों की दिशा और दशा के मद्देनजर जमीनी स्तर के किसान  नेताओं का टोटा महसूस किया जा रहा था..... यह कमी अब भी है . . फिर भी हर पल उन्होंने बतौर किसान नेता अपनी जवाबदेहिया व्यापक...

शुक्रवार, 11 दिसंबर 2015

आज से मेरे फन का मकसद है जंजीरें पिघलाना , आज से मैं शबनम के बदले अंगारे बरसाऊँगा

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  आज से मेरे फन का मकसद है जंजीरें पिघलाना   आज से मैं शबनम के बदले अंगारे बरसाऊँगा चुनौती भरे 1095  दिन ================= छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने राज्य  के अगुवा  की हैसियत से शनिवार को 12 बरस पूरे कर लिए .निश्चित रूप से यह  लम्हा  उनके  लिए...

गुरुवार, 10 दिसंबर 2015

दिल मेरा धड़कता है इन ठण्ड भरी रातों से तकदीर मेरी लिख दो मेहंदी भरे हाथों से

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 दिल मेरा धड़कता है इन ठण्ड भरी रातों से ,तकदीर मेरी लिख दो मेहंदी भरे हाथों से    Posted by KISHORE DIWASE with No comments ये सर्द रात ,ये आवारगी,ये नींद का बोझ  हम अपने शहर में होते तो घर चले जाते बढ़ते शहर में मौसम को जीने...

लघुकथा ;इक्कीसवी सदी का महाभारत

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लघुकथा ;इक्कीसवी सदी का महाभारत  ----------------------------------------                         इक्कीसवी सदी की बात है .किस्सा महाभारत नाम के देश का है .संसद का शीत सत्र चल रहा था .भयंकर कोहराम की वजह से  उनकी अगुवा...