गुरुवार, 17 मार्च 2011

चुटकी भर गुलाल-1

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रंग भरे मौसम से रंग चुरा के...
(चौराहे पर मजमा फिट है.बच्चे...जवान और बुजुर्ग ... छोकरे और छोकरियाँ सभी मजमा देखने में फिट हैं.तभी तो उस्ताद का मजमा हिट है भाई! ये मजमा होली के दौरान का है.भीड़ में मौजूदा लोगों के चेहरे से जिद्दी रंग है कि छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहे है.दद्दू की दाढ़ी  से चिपके रंग चुगली कर रहे हैं कि होली मनी है.प्रोफ़ेसर प्यारेलाल टी शर्ट में जंच रहे हैं.बाकी सब छोकरे-छोकरियाँ अपने अंदाज में अलहदा तरीके से कपडे  पहन कर मजमे में हैं और उनपर रंग-गुलाल के धब्बे खिलखिलाकर इतरा रहे है.)
उस्ताद-तो जम्हूरे तू तैयार है! करदे मजमा फिट ... उस्ताद हो जाएगा हिट.
जम्हूरे-उस्ताद का सिग्नल मिला और अपुन का डुगडुगी बजाना शुरू.लेकिन उस्ताद एक बात अपने समझ में नहीं आई.!
उस्ताद- वो क्या जम्हूरा?
जम्हूरा- ये सामने डिब्बों में सफ़ेद,लाल, पीला,हरा, गुलाबी,नीला... इतने रंगों का जमघट काहे को लगा रखा है?
               मेहरबानों... साहबानों... कदरदानों...है कोई  माई ( या बाप) का लाल जो यह बताए कि ये रंग यहाँ पर क्यों रखे हैं?
( भीड़ कुछ खामोश है .. खुसुर- पुसुर के बावजूद लोग कन्फ्यूज्ड हैं ) दद्दू दाढ़ी खुजाकर अपने रंगीन शब्द उगलते है.
दद्दू- दोस्तों! होली के दिन ही अपुन के एक चाहने वाले का मैसेज आया था मोबाइल पर. उसके मुताबिक सफ़ेद  रंग-रफ़्तार ,लाल रंग- ताकत,पीला रंग-ज्ञान,हरा रंग- विकास गुलाबी रंग-प्रेम और नीला रंग -सफलता का प्रतीक है.
जम्हूरा- उस्ताद! मेरे कू भी एक मैसेज आया .उसमें अंग्रेजी में लिखा था जो बंटी ने पढ़कर सुनाया था - नीला रंग-गीत का,पीला रंग संगीत का,हरा रंग -नृत्य का लाल रंग  खूबसूरती का सफ़ेद रंग -प्रेम और गुलाबी रंग ख़ुशी जाहिर करता है . वैसे कलर थेरपी और रंगों का विज्ञानं कुछ और तर्क भी बताता है .
( प्रोफ़ेसर साहब ! आप भी तो कुछ तो बोलिए .. .उस्ताद ने जब कालेज के सामने मजमा फिट किया था तब प्रोफ़ेसर से अच्छी जम गई थी क्या!)
    मेहरबानो.. साहबानों.. कद्रदानों ...जम्हूरे की डुगडुगी बजती है )
प्रोफ़ेसर- रंगों के बगैर सब कुछ फीका है सोचो! कुदरत में रंग न होते... रंगों के बगैर कैसे खेलते हम होली?और जिंदगी में अगर मुहब्बत और जिम्मेदारी के रंग ना हों तो ये जिंदगी भी कोई जिंदगी है लल्लू रंग एक-दूसरे के बीच रिश्ता जोड़ते हैं इसलिए जो होली खेलते हैं उनके गालों पर रंग भरी चुटकी और जो रंगों से बचते है या मैसेज भी नहीं देते हैं उनको ठेंगा .. ठेंगा... ठेंगा...!
     भूतपूर्व होलियारों का मजमा जोरदार तालियाँ बजाता है और अचानक किसी के मोबाइल पर एम् पी थ्री गाना बजाने लगता है

होली के दिन दिल खिल जाते हैं....

उस्ताद-जम्हूरे ! इस बार बच्चा पार्टी ने कैसी मनाई होली?
जम्हूरा- छोटे बच्चे भला गीले रंगों से खेलना कहाँ छोड़ेंगे ? जिनकी परीक्षा चल रही थी ऐसे लड़के- लड़कियों ने थोड़ी देर ही सही मस्तियाँ  की. हाँ अब लोग सूखी होली अधिक खेलने लग गए हैं.सभी लोग अब रंगों के खतरनाक प्रभाव से वाकिफ हो गए हैं लिहाजा रंगों से बचना भी जानते हैं.
    एकाएक बाइक पर सवार कुछ बिंदास नवयुवकों की टोली अलमस्त अंदाज में फर्राटा मरते हुए भीड़ के करीब पहुंची और लगी चहकने
             नेताजी लाल है .......
             राशन दूकानदार लाल है... 
              वो जा रहा है वो भी लाल है...
             जो टुन्नी में है वो  भी लाल है!!!!!!!!!!!
इसी बीच एक बेवडा खम्भे से टकराकर चारों खाने चित्त हो गया. कुछ देर बाद एक कुत्ता आया बेवडे का मुंह चाटा
 और सर नीचे कर पिछली टांग ऊपर उठा ली और उसपर....
.मजमें में फिट लोगों की मुण्डियाँ घूमी .पर जैसे ही वे मामला समझ पाते बाइक वाले होलियारों की टोली फुर्र हो गई.भीड़ में से एक अधेड़ को भंग की पिन्नक कुछ ज्यादह चढ़  गई थी .उसने अपनी जेब से एक अंटा निकालकर बाजू वाले साथी को दिया और अपनी ही रौ में अलाप लेने लगा--
                         रंग बरसे भीगे चुनर वाली रंग बरसे
इसी बीच मजमें में फिट लोगों पर दुमंजिले से किसी ने रंग भरी बाल्टी उड़ेल दी.... एक ओर रंगों के अनगिनत गुबार उड़ने लगे... लोग एक-दूसरे को बधाइयाँ देने लगे होली है...होली है... बच्चे मस्त हैं...एक देवर अपनी भाभी के गालों पर गुलाल मल रहा था तो ओम गार्डेन्स के किसी फ़्लैट में एक पति अपनी पत्नी का " रंगे हाथों से " पीछा करते हुए तरन्नुम में गा रहा था " आज न छोड़ेंगे बस हमजोली ..." कुछ बुजुर्गों के माथे पर तिलक लगाकर युवक-युवतियां प्रणाम कर रहे थे. किसी फ़्लैट से ऍफ़ एम् पर आवाज गूँज रही है " मुझे रंग दे.. मुझे रंग दे... रंग दे रंग दे रंग दे....
                                            रात में जली होली अभी दहक रही है.उस्ताद और जम्हूरा अपना तमाशा समेटने  में लगे हैं.और मजमे में फिट लोग लौटने को तैयार.दद्दू ने भी रंगों को आपस में बातचीत करते हुए देखा और खुद भी उनसे बातचीत की.
                             मुझे तो अक्षर भी रंगों के छींटे नजर आते हैं.... कभी रंग तो कभी रंग-बिरंगे फूल.जिनमें छिपे होते हैं कुछ आज और कुछ कल की बीती होलियों के गुदगुदाते हुए पल.देखना कहीं अल्फाजों के ये रंगीन कतरे आपके गालों तक  तो  नहीं  पहुँच गए?दिन में खेली होली के रंग देर शाम तक धुल चुके होते  हैं.अचानक मोबाइल पर फिर एक मैसेज आता है और स्क्रीन पर उभरे शब्द प्यार के रंग बनकर सीधे दिल में उतर जाते हैं
   मेहरबानों... साहबानों... कद्रदानों... उस्ताद का मजमा  ख़त्म हुआ ....
         हम हैं राही प्यार  के ... फिर मिलेंगे चलते चलते ...!!!!!!!!!!!!!
     होली पर आप सब को प्यार... रंग-गुलाल... और मिठाइयो से भी मीठी -मीठी  शुभकामनाएँ   
                                                        मुस्कुराते रहें...           
                                                                                    किशोर दिवसे
                                                        

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