गुरुवार, 16 दिसंबर 2010

मैं नाना बन गया...

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    .मेरे प्यारे दोस्तों ,
काफी वक्त बाद आपसे रू-ब-रू हो रहा हूँ.दरअसल मैं नाना बन गया हूँ.बेटी सपना ने बेटे को जन्म दिया हैपिछ्ली  ३ तारीख़ को. व्यस्त था सो आपसे बात नहीं कर पाया. नन्ही जिंदगी के साथ वक्त बिताना अपने और अपने बच्चे के भी बचपन की तमाम यादों के दरीचे को पलटना सा लगता है. नाना बनने का रोमांच अपने साथ न जाने कितनी जिम्मेदारियों का एहसास करा जाता है. याद आ जाती है अपने नाना -नानी के दौर की बाते जो हमने जी थीं . आज जब खुद नाना बन गया हूँ तब लगता है जिंदगी न जाने कितनी करवटें ले चुकी है. खैर , यह तो नियति है ... जन्म चक्र इसी तरह चला करता है.कुल मिलाकर एक ट्रांस महसूस कर रहा हूँ इन दिनों. फिर भी जल्द ही बातचीत शुरू करूंगा.
                                                                      आपका
                                                                                किशोर दिवसे
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5 टिप्‍पणियां:

  1. न न के साथ दो डंडे
    या दो ना ना
    मिल कर बनते हैं नाना .
    मिठाई भी तो लगनी है,
    रिसेप्सन तो खाया था.

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  2. भैया आपको बहुत बहुत बधाई, सपना और दामाद जी को भी, कितनी खुशी की बात आपने शेयर की है.

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