
....और मैं ही बन गया दीप पर्व का दीप
नारायण... नारायण...नारायण.... नारायण....चौंककर नारद जी ने देखा और उनसे रहा न गया.उनहोंने पल भर काबू रहने के बाद पूछ ही लिया " यह क्या त्राटक सीख रहे हो जो जलते दीये कि लौ को एकाग्र होकर घूरे जा रहे हो! किसी के आने का आभास भी नहीं?""नहीं...
3:06 am