मंगलवार, 11 सितंबर 2012

भूख हूँ मैं... | Kishore Diwase

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भूख हूँ मैं... | Kishore Diw...

भूख हूँ मैं...

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राबर्ट बिनयन की एक(अनूदित ) कविता  भूख हूँ मैं... ========= भीड़ से छिटककर आता हूँ मैं किसी परछाई की तरह /और बैठ जाता हूँ हर इंसान की बाजू में कोई भी नहीं देखता मुझे/पर सभी देखते हैं एक-दूसरे का चेहरा वे जानते हैं की मैं वहां पर हूँ मेरा मौन है किसी लहर की ख़ामोशी जो लील लेता...