मंगलवार, 31 मई 2011

वो तिल बना रहे थे, स्याही फिसल गई

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वो तिल बना रहे थे, स्याही फिसल गई उस रोज रेडियो पर किसी कार्यक्रम में बहस चल रही थी काले और गोरे रंग को फिल्म वालों  ने किस तरह तरजीह दी है....हिरोइन या हीरो काले क्यों नहीं होते? गोरा रंग ही क्यों अपील करता है...( हालाकि आज के दौर में इस बाबत भी प्रयोग होने लगे है.) फ़िल्मी गीतों में काले...

सोमवार, 30 मई 2011

समंदर है जिन्दगी और प्यार अतलांत...

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समंदर है जिन्दगी और प्यार अतलांत...ट्रेन में मुसाफिरी के दौरान कुछ कदम साथ चलने वाले हमसफर ऐसे भी मिलते है जो यादों में अमिट इबारत बनकर चस्पा हो जाते है हमेशा के लिए...!           अमूमन रिजर्वेशन कम्पार्टमेंट  में यूं होता है कि ट्रेन के स्टेशन छोड़ने के कुछ मिनटों...

शनिवार, 14 मई 2011

मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा !

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जींस -टॉप... कार्गो टी-शर्ट ... फंकी -शंकी  लुक वाले नौजवान छोकरों और बोल्ड ब्यूटीफुल और बिंदास लड़कियों से घिरा था मैं.भाई कुछ भी बोलो मुझे तो आज की नयी जनरेशन बेहद पसंद है... बिलकुल मीठे-नमकीन बिस्कुट फिफ्टी-फिफ्टी या फिर खट्टी -मीठी इमली की तरह.आज के ज़माने में जब हाफ  सेंचुरी के करीब...

शुक्रवार, 6 मई 2011

जहाँ कानून बेआवाज होगा ,वहीँ से जुर्म का आगाज होगा

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जहाँ कानून बेआवाज होगा ,वहीँ से जुर्म का आगाज होगा  अल्सुब्बह दद्दू तफरीह कर लौटे और श्रीमती जी ने चाय का प्याला उनकी टेबल पर धर दिया.शहर से छपने वाले दो-तीन अखबारों के पन्ने पल्टाते पूरा चाट गए.खाली प्याला देखकर सोचने लगे ," अखबारों में जुर्म की ख़बरें इतनी ज्यादा क्यों हैं! क्या हो गया है...

गुरुवार, 5 मई 2011

वो शख्स धूप में देखूं तो छांव जैसा था.

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वो शख्स धूप में देखूं तो छांव जैसा था. गरमी, सर्दी या बारिश ... मौसम चाहे कैसा  भी हो हमारी बातचीत का एक जुमला तयशुदा होता है .सर्दियों में बाप रे!कितनी ठण्ड लग रही है!बारिश में ... ओफ ओह... क्या घनघोर बारिश है!और आज जब लू के थपेड़े चल रहे हैं हम यह कहने से नहीं चूकते "क्या जबरदस्त गरमी है...